सुप्रीम कोर्ट में आज निजी एयरलाइनों की टिकट की मनचाही और अतिरिक्त शुल्कों पर नियंत्रण की मांग वाली याचिका पर सुनवाई होगी। इसके अलावा हवाई शुल्क सहित अन्य कीमतों में होने वाले अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव पर रोक लगाने के लिए नियामक दिशानिर्देश बनाने की भी मांग की गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, आज शीर्ष अदालत एक में याचिका पर सुनवाई होगी, जिसमें निजी एयरलाइनों द्वारा वसूले जाने वाले किराए सहित अन्य शुल्कों में ‘अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव’ पर रोक लगाने के लिए नियामक दिशानिर्देश बनाने की मांग की गई है। इस याचिका के द्वारा स्वतंत्र नियामक बनाने के साथ घटती-बढ़ती कीमतों पर निगरानी रखने के साथ बैगेज नियमों की समीक्षा करने और यात्रियों के अधिकारों की रक्षा से जुड़े सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाने की मांग की गई है।
खबर के मुताबिक़, याचिका में नागरिक उड्डयन क्षेत्र में पारदर्शिता एवं उचित मूल्य निर्धारण सहित यात्रियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र नियामक संस्था गठित करने की भी मांग की गई है। इसके लिए सामाजिक कार्यकर्ता एस लक्ष्मीनारायणन द्वारा दायर याचिका पर न्यायमूर्ति संदीप मेहता और विक्रम नाथ की बेंच सुनवाई करेगी।
याचिका के ज़रिए इन मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि निजी एयरलाइनों के पास फिलहाल मनमाने ढंग से किराया बढ़ाने और अतिरिक्त शुल्क वसूलने की लगभग असीमित छूट है, खासकर जब यात्रा की मांग अधिक होती है।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट इससे पहले 15 मई को भी हवाई किरायों में संतुलन लाने की जरूरत पर टिप्पणी कर चुका है। इसके अलावा केंद्र सरकार से हवाई यात्रियों को राहत दिलाने के उपाय करने की बात कही जा चुकी है। अदालत ने इस बात पर भी एतराज़ जताया था कि एक ही मार्ग पर उड़ान भरने वाली अलग-अलग एयरलाइनें एक ही दिन में अलग-अलग किराया वसूल करती हैं।
इस मामले को स्वीकार करते केंद्र सरकार ने हुए सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी थी कि भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 जनवरी 2025 से लागू हो चुका है और इससे जुड़े नियमों पर फिलहाल परामर्श की प्रक्रिया जारी है। जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता रविंद्र श्रीवास्तव के माध्यम से पेश हुए याचिकाकर्ता का कहना है कि विमान अधिनियम, 1937 के तहत पहले से ही नियामक प्रावधान मौजूद हैं, लेकिन उनका प्रभावी तरीके से पालन नहीं कराया जा रहा है।
वहीँ सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष 17 नवंबर को केंद्र सरकार और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया था। इससे पहले केंद्र सरकार ने अदालत को बताया था कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय याचिका में उठाए गए सभी मुद्दों की सक्रिय रूप से जांच कर रहा है।
मामले की पिछली सुनवाई 19 जनवरी को हुई थी और तब सुप्रीम कोर्ट ने हवाई शुल्क में ‘अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव’ की जांच करने की बात कही थी। अदालत द्वारा फेस्टिवल सीज़न में टिकटों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी पर इसे शोषण करार दिया गया था। साथ ही केंद्र सरकार तथा नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) से जवाब दाखिल करने को कहा गया था।