किसी मुद्दे का विरोध देशद्रोह की परिभाषा में नहीं होना चाहिए: सोराबजी

नई दिल्ली : दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में एबीवीपी और आईसा के बीच हुई हिंसा और उसके बाद लेडी श्रीराम कॉलेज की छात्रा गुरमेहर कौर के साथ हुए व्यवहार को पूर्व अटार्नी जनरल सोली सोराबजी शर्मनाक करार दिया है. उन्होंने इस मामले में बीजेपी सांसदों के बयान की भी निंदा की है. Sorabjee

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देश के जाने माने वकील और संविधान विशेषज्ञ सोली सोराबजी की नजरों में डीयू और जेएनयू में जो हुआ, उसमें देशद्रोह तय करने के लिए मौजूदा कानून की नहीं, बल्कि आरोपियों के ऐक्शन की समीक्षा होनी चाहिए.

सोराबजी ने आजतक से बातचीत में कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में देशद्रोह को लेकर जो फैसला दिया है, वह अपने आप में काफी कुछ कहता है.

लिहाजा इस बारे मे कोई भी कदम उठाने या बयान देने से पहले अभियोजकों को सुप्रीम कोर्ट का वह आदेश जरूर पढ़ लेना चाहिए.’

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगर देशद्रोह की धारा यानी 124-ए को ज्यादा स्पष्ट करने के लिए फिर से परिभाषित करने की जरूरत भी पड़े तो ये फैसला अपने आप में काफी अहम है.

पूर्व अटार्नी जनरल सोली सोराबजी ने कहा, ‘भारत में किसी का पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाना अनुचित तो है, लेकिन देशद्रोह नहीं.

लेकिन हां, कोई भारत मुर्दाबाद या भारत माता मुर्दाबाद के नारे लगाए उस पर राष्ट्रद्रोह का आरोप हो सकता है, क्योंकि ये देश की संप्रभुता को चुनौती देने जैसा है.

देश की संप्रभुता या लोकतांत्रिक सत्ता के खिलाफ हिंसा को भड़काने के मकसद से आवाज उठाना देशद्रोह है. लेकिन अभिव्यक्ति की आजादी के तहत किसी मुद्दे का विरोध करना देशद्रोह की परिभाषा में नहीं होना चाहिए.

गुरमेहर मामले में बीजेपी सांसदों के बयान की निंदा करते हुए सोली सोराबजी ने कहा कि ऐसी बातें करने वाले लोगों को तो सांसद होने का नैतिक हक नहीं है.

पार्टी को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए. अभी जिन मुद्दों को उठाकर देशद्रोह की बात की जा रही है वह मिस ऐप्लीकेशन ऑफ लॉ है.

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