प्रवासी पक्षियों के आवास व उड़ान स्थल के संरक्षण के लिए संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम कई देशों में प्रयास कर रहा है। इसके लिए अनेक परियोजनाएँ संचालित की जा रही हैं।

10 मई, को विश्व प्रवासी पक्षी दिवस के अवसर पर पक्षियों को विलुप्ति से बचाने के लिए किये जा रहे कुछ प्रयासों पर एक नज़र डालें तो पाते हैं कि प्रवासी पक्षियों की कम से कम 134 प्रजातियाँ, विलुप्ति के ख़तरे में हैं। लाखों पक्षी हर साल वसंत और शरद ऋतु में प्रजनन और शीतकालीन आवासों के बीच लम्बी उड़ानें भरते हैं। ये प्रवासी पक्षी न केवल जैव विविधता बनाए रखने में मदद करते हैं, बल्कि कीट नियंत्रण और बीज वितरण जैसे पारिस्थितिकी तंत्र की ज़रूरतों में भी अहम भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा ये पक्षी अपनी यात्राओं से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों और संस्कृतियों को भी जोड़ते हैं।
प्रवासी प्रजातियों पर कन्वेंशन की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, 1189 प्रवासी प्रजातियों में से 44 प्रतिशत की संख्या घट रही है और 22 फ़ीसदी विलुप्ति के कगार पर हैं।
वर्तमान में इन पक्षियों की यात्राएँ अब पहले से कहीं अधिक ख़तरनाक हो गई हैं।उनके अस्तित्व को ख़तरे में डालने वाले कारण में जलवायु परिवर्तन के अलावा अवैध शिकार, कांच की इमारतें, बिजली की लाइनें, और तेज़ी से घटते आवास जैसे कारक शामिल हैं। ख़ासतौर पर शहर के क्षेत्र अब इनके लिए ज़्यादा जोखिम भरे बन चुके हैं जहाँ कभी ये कुछ विश्राम के लिए रुकते थे।
प्रवासी प्रजातियों पर कन्वेंशन की 2024 की रिपोर्ट एक वैश्विक समझौता है, जो सीमाओं के पार यात्रा करने वाले पशुओं की रक्षा के लिए बनाया गया है। यही रिपोर्ट बताती है कि प्रवासी पक्षियों की कम से कम 134 प्रजातियाँ, विलुप्ति के ख़तरे में हैं।
इसकी रोकथाम के लिए ‘Generation Restoration Cities’ जैसी पहल, स्थानीय निवासियों को प्रेरित करने और दुनिया भर में नगरपालिका व क्षेत्रीय अधिकारियों को परस्पर अनुभव साझा करने में मदद करती हैं।
यह एक वैश्विक समझौता है, जो सीमाओं के पार यात्रा करने वाले पशुओं की रक्षा के लिए बनाया गया है। ‘Generation Restoration Cities’ जैसी पहल, स्थानीय निवासियों को प्रेरित करने और दुनिया भर में नगरपालिका व क्षेत्रीय अधिकारियों को परस्पर अनुभव साझा करने में मदद करती हैं।
इस शहर ने की है अनूठी पहल
तुर्की का शहर इस्तांबुल अफ़्रीकी-यूरेशियाई फ्लाईवे पर स्थित है, जहाँ हर वसंत और शरद ऋतु में हज़ारों सारस, शिकारी पक्षी और अन्य प्रजातियाँ ठहरती हैं। परंतु शहरीकरण, हवाई अड्डे और पुल जैसी परियोजनाएँ, उनके विश्राम स्थलों को प्रभावित कर रही हैं।
इसकी रोकथाम के लिए, इस्तांबुल महानगरपालिका ने UNEP की “Generation Restoration Cities” पहल के तहत एक परियोजना शुरू की है। इसका उद्देश्य, जैव विविधता और प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के साथ-साथ नागरिकों को जागरूक बनाना है।
शहर में बस अड्डों पर पोस्टर और वीडियो के ज़रिए पक्षियों की जानकारी दी जा रही है। छतों पर घास और फूल लगाए जा रहे हैं ताकि लोग स्थानीय वन्यजीवों की सराहना कर सकें।
साथ ही, प्राथमिक विद्यालयों में जैव विविधता की शिक्षा देने और मई में एक कार्यशाला आयोजित करने की योजना है, जहाँ नागरिक समाज, व्यवसाय और सरकार, एक साथ मिलकर हरित स्थलों के संरक्षण पर विचार करेंगे।
