2026 की वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट से पता चलता है कि फिनलैंड को एक बार फिर दुनिया का सबसे खुशहाल देश घोषित किया गया है। भारत 147 देशों में से 116वें स्थान पर रहा; यह 2025 के 118वें और 2024 के 126वें स्थान से थोड़ा बेहतर प्रदर्शन है।
वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2026 से पता चला है कि युवाओं में खुशी के लेवल में काफी गिरावट आई है, जिसका मुख्य कारण सोशल मीडिया का बढ़ता इस्तेमाल है। यह रिसर्च लगभग 140 देशों में 100,000 लोगों के सर्वे पर आधारित है, जिसके मुताबिक कुछ युवा चाहते हैं कि कोई भी सोशल मीडिया का इस्तेमाल न करे।
हालांकि, सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल से दुनिया भर के युवाओं पर इसका बहुत ही बुरा असर पड़ रहा है। इन हालात में 2026 की रिपोर्ट के से पता चलता है कि फिनलैंड को एक बार फिर दुनिया का सबसे खुशहाल देश घोषित किया गया है।
यह रिपोर्ट यूनिवर्सिटी ऑफ़ ऑक्सफ़ोर्ड के वेलबीइंग रिसर्च सेंटर ने गैलप और यूनाइटेड नेशंस के साथ मिलकर तैयार की है। इसमें कहा गया है कि पिछले दस सालों में यूनाइटेड स्टेट्स, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड समेत कई देशों में 25 साल से कम उम्र के लोगों में लाइफ सैटिस्फैक्शन का लेवल तेज़ी से गिरा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल युवाओं, खासकर इंग्लिश बोलने वाले और वेस्टर्न यूरोपियन देशों में टीनएज लड़कियों की सेहत में गिरावट से जुड़ा है। ध्यान रहे कि ये नतीजे ऐसे समय में आए हैं जब सरकारें युवाओं के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने पर विचार कर रही हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यूएस में ज़्यादातर कॉलेज स्टूडेंट्स चाहते हैं कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म न हों। रिसर्चर्स के मुताबिक, दिन में 7 घंटे से ज़्यादा सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से सेहत कम होती है, जबकि एल्गोरिदम-बेस्ड, इमेज-फोकस्ड प्लेटफॉर्म और इन्फ्लुएंसर कंटेंट को इसके बड़े कारण बताया गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्टूडेंट्स का कहना है कि वे सोशल मीडिया इसलिए इस्तेमाल करते हैं क्योंकि दूसरे लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन वे चाहते हैं कि कोई और इसका इस्तेमाल न करे। हालांकि, जो लोग दिन में एक घंटे से भी कम समय के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं, उनमें उन लोगों की तुलना में सेहत बेहतर होने की संभावना ज़्यादा होती है जो सोशल मीडिया का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं करते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, फिनलैंड को लगातार नौवें साल दुनिया का सबसे खुशहाल देश बताया गया, जबकि नॉर्डिक्स रैंकिंग में टॉप पर रहे। इसका कारण पैसा, बराबरी, एक मज़बूत वेलफेयर सिस्टम और ज़्यादा उम्र को बताया गया।
2026 की वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट के अनुसार, भारत 147 देशों में से 116वें स्थान पर रहा; यह 2025 के 118वें और 2024 के 126वें स्थान से थोड़ा बेहतर प्रदर्शन है। फिनलैंड लगातार नौवें वर्ष इस इंडेक्स में शीर्ष पर रहा। कोस्टा रिका रैंकिंग में चौथे स्थान पर आया, जिसका श्रेय मजबूत सामाजिक और पारिवारिक संबंधों को दिया गया। जबकि भारत चीन (60वां स्थान) और पाकिस्तान को इस रिपोर्ट में 104वां स्थान मिला है। अफ़गानिस्तान लिस्ट में सबसे नीचे रहा।