एक नए अध्ययन से पता चला है कि पृथ्वी के घूर्णन (Earth’s rotation) की गति धीरे-धीरे कम होने से हमारे वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ सकती है।

नेचर जियोसाइंस में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार, पृथ्वी का निर्माण लगभग 4.5 अरब वर्ष पहले हुआ था और तब से चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण के कारण इसकी घूर्णन गति धीरे-धीरे कम होती जा रही है, जिसके कारण पृथ्वी पर दिन लगातार लंबे होते जा रहे हैं।
अध्ययन से मिलने वाले चलता है कि 1.4 अरब वर्ष पहले दिन लगभग 18 घंटे लंबे होते थे लेकिन वर्तमान में दिन 24 घंटे लंबा है। यह बताता है कि पृथ्वी के घूर्णन की गति धीमी होने का जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा है।
पृथ्वी के धीरे-धीरे घूमने के कारण लंबे दिन हुए, जिससे सायनोबैक्टीरिया को सूर्य के प्रकाश के संपर्क में अधिक समय मिला। इस बढ़ी हुई प्रकाश ऊर्जा ने उन्हें अधिक ऑक्सीजन उत्पन्न करने और वातावरण में छोड़ने के लिए प्रेरित किया, जिससे वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ी।
इसलिए शोधकर्ताओं ने अध्ययन के दौरान हूरोन झील में सूक्ष्मजीवी मैट देखे, जहाँ ऑक्सीजन उत्पन्न करने वाले साइनोबैक्टीरिया सल्फर-मेटाबॉलिज़्म करने वाले सूक्ष्मजीवों से प्रतिस्पर्धा करते हैं।
समुद्र विज्ञानी ब्रायन ऑर्बिक के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन से ऑक्सीजन उत्पादन और दिन की लंबाई के बीच सीधा संबंध सामने आया है। अध्ययन के अनुसार दिन के लंबे होने से साइनोबैक्टीरिया (नीली-हरी शैवाल) प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से अधिक ऑक्सीजन का उत्पादन कर पाते हैं क्योंकि उनका जीवन न केवल सूर्य के प्रकाश पर बल्कि उनके मेटाबोलिक सिस्टम के समय पर भी निर्भर करता है।
समुद्र विज्ञानी ब्रायन आर्बिक और उनकी टीम ने ऐसे प्रयोग और मॉडलिंग की जो दिन की लंबाई को इन सूक्ष्मजीवों द्वारा ऑक्सीजन उत्पादन से जोड़ते हैं। उनके परिणाम बताते हैं कि लंबे दिनों ने लंबी “ऑक्सीजन खिड़कियाँ” (oxygen windows) बनाईं, जिससे न केवल महान ऑक्सीकरण घटना के दौरान, बल्कि 550 से 800 मिलियन वर्ष पहले नियोप्रोटेरोज़ोइक ऑक्सीजनेशन घटना (Great Oxidation Event) के दौरान भी वायुमंडलीय ऑक्सीजन में वृद्धि हुई।













