आज की धरती पर जिस जगह को हम हेती के नाम से जानते हैं, वहां वर्ष 1791 में ‘साँ दोमिन्ग’ में 22-23 अगस्त की रात्रि को एक विद्रोह की शुरुआत हुई है। इस विद्रोह ने ट्रांस-अटलांटिक दास व्यापार पर आखिरकार विराम लगाने में अहम भूमिका निभाई।

इस पृष्ठभूमि में को याद में विश्व भर में 23 अगस्त को इसे अन्तरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की गई। हर वर्ष 23 अगस्त को मनाए जाने वाले इस अन्तरराष्ट्रीय दिवस के ज़रिए दास व्यापार की त्रासदी, उसकी पीड़ा को ध्यान दिलाने का प्रयास किया जाता है।
इस दिन उन देशों व लाखों व्यक्तियों को श्रृद्धांजलि दी जाती है जो दास व्यापार का सामान बने और जिन्हें जहाज़ों पर सवार होकर समुद्री यात्राएँ करने के लिए मजबूर किया गया।
इक्कीसवीं सदी का चौथाई समय गुज़र जाने के बावजूद आधुनिक दासता आज भी बरक़रार है। आज का दिन हमें इस अतीत और आज तक चले आ रहे अंन्याय से रूबरू कराता है। यह दिन एहसास कराता है कि हर एक व्यक्ति की गरिमा व अधिकारों को बनाए रखें।
संयुक्त राष्ट्र इस संबंध में लगातार काम कर रहा है और निरन्तर इन लक्ष्यों की ओर अग्रसर है, जिनके तहत वर्ष 2007 में पार-अटलांटिक दास व्यापार व दासता पर एक कार्यक्रम को स्थापित किया गया था।
इस अवसर पर यूनेस्को महानिदेशक ऑड्री अज़ूले ने अपने सन्देश में कहा कि यह समय मानव शोषण का पूर्ण रूप से अन्त करने और हर एक व्यक्ति के लिए समान व बिना किसी शर्त के गरिमा को मान्यता देने का है।
यूएन उपमहासचिव आमिना मोहम्मद ने अपने सन्देश में कहा कि यह दिवस, पार-अटलांटिक दास व्यापार के पीड़ितों को सम्मान देने का एक अवसर है, मगर यह लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है।
इसके अलावा यूनेस्को महानिदेशक ऑड्री अज़ूले ने कहा कि आइए, हम अतीत के उन भुक्तभोगियों और स्वाधीनता की लड़ाई लड़ने वाले लोगों को याद करें, ताकि वे भावी पीढ़ियों को न्यायोचित समाज को आकार देने के लिए प्रेरित कर सकें।













