भारत में आर्थिक और ग़ैर-आर्थिक मानकों पर ग़रीबी कम करने में अहम प्रगति हुई है-वर्ल्ड बैंक

वर्ल्ड बैंक की एक नई रिपोर्ट बताती है भारत ने बीते एक दशक में आर्थिक और ग़ैर-आर्थिक मानकों पर ग़रीबी कम करने में अहम प्रगति हुई है। रिपोर्ट से यह जानकारी भी सामने आई है कि ग़रीबी में कमी आने के साथ अब यह उन परिवारों में अधिक केंद्रित हो गई है, जिनमें शिक्षा का स्तर कम है, संपत्ति कम है, स्थायी रोज़गार तक पहुंच सीमित होने के साथ आश्रितों की संख्या अधिक है।

वर्ल्ड बैंक की इस के अनुसार, ग़रीबी का संबंध ख़ास भौगोलिक क्षेत्रों से भी है। ज़्यादातर राज्यों में जीवन स्तर में सुधार हुआ है, लेकिन उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक फैले एक सटे हुए क्षेत्र के परिवारों में देश की कुल ग़रीब आबादी का क़रीब 57 फीसदी हिस्सा रहता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है, ‘इसके अलावा, वास्तविक मज़दूरी में मोटे तौर पर कोई बदलाव नहीं हुआ, जबकि रोज़गार में बढ़ोतरी मुख्य रूप से अपेक्षाकृत कम उत्पादकता वाली गतिविधियों में हुई।

रिपोर्ट के अनुसार, मज़दूरी में असमानता अब भी अधिक है। साल 2023 में सबसे अधिक कमाई करने वाले 10 फ़ीसदी श्रमिकों की औसत मज़दूरी सबसे कम कमाई करने वाले 10 फ़ीसदी श्रमिकों की तुलना में क़रीब 13 गुना थी।

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि ग़रीबी में कमी आने के साथ अब यह उन परिवारों में अधिक केंद्रित हो गई है, जहाँ शिक्षा का स्तर कम है, संपत्ति कम है, स्थायी रोज़गार तक पहुंच सीमित है और आश्रितों की संख्या अधिक है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2017 से 2023 के बीच रोज़गार में क़रीब 13.4 करोड़ लोगों की वृद्धि हुई। वर्ल्ड बैंक द्वारा जारी ‘भारत की ग़रीबी और समानता’ रिपोर्ट के मुताबिक़, ‘2011 से 2023 के बीच निम्न-मध्यम आय वाले देशों के लिए निर्धारित ग़रीबी रेखा (4.2 डॉलर प्रतिदिन) से नीचे रहने वाली आबादी का अनुपात 57.7 फ़ीसदी से घटकर 16.1 फीसदी रह गया है।’

रिपोर्ट बताती है कि इस दौरान अनुमानित 49.6 करोड़ लोग ग़रीबी से बाहर आए हैं जबकि ज़्यादा ग़रीबी (3 डॉलर प्रतिदिन) में रहने वाली आबादी का अनुपात 27.1 फ़ीसदी से घटकर 2.6 फ़ीसदी रह गया है।

वर्ल्ड बैंक के अनुसार ग़रीबी में कमी का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है हालांकि इसकी रफ़्तार धीमी हो सकती है। प्रतिदिन 4.20 डॉलर की ग़रीबी रेखा के आधार पर 2026 में ग़रीबी दर 14.2 फ़ीसदी से घटकर 2028 तक 12.1 प्रतिशत होने की उम्मीद है।

विश्व बैंक के अनुसार ग़रीबी का आकलन ग़ैर-आर्थिक मानकों पर ऑक्सफ़र्ड पॉवर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनिशिएटिव (ओपीएचआई) के बहुआयामी ग़रीबी सूचकांक (एमपीआई) के आधार पर किया जाता है। इसके मुताबिक, 2005-06 में ग़रीबी दर 53.8 प्रतिशत थी जो साल 2019-21 में घटकर 16.4 प्रतिशत रह गई। वर्ल्ड बैंक का बहुआयामी ग़रीबी सूचकांक बताता है कि साल 2022-23 में यह दर 15.5 प्रतिशत थी।

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