शुभांशु शुक्ला ने अन्य साथियों के साथ पूरा किया अंतरिक्ष से पृथ्वी तक का सफर

शुभांशु शुक्ला सहित सभी अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन की यात्रा पूरी करके पृथ्वी पर वापस आ गए हैं। स्पेसएक्स का ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट दोपहर करीब 3 बजे इस सभी को लेकर पृथ्वी पर उतरा। स्पेसएक्स ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में ड्रैगन के सुरक्षित उतरने की पुष्टि की है।

शुभांशु शुक्ला ने अन्य साथियों के साथ पूरा किया अंतरिक्ष से पृथ्वी तक का सफर

ये अंतरिक्ष यात्री 20 दिन बाद अंतरिक्ष से वापस पृथ्वी पर लौटे हैं। करीब 23 घंटे की यात्रा के बाद ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट ने कैलिफोर्निया के समंदर में स्पैलशडाउन किया। चारों अंतरिक्ष यात्री एक दिन पहले आईएसएस से पृथ्वी के लिए रवाना हुए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैप्टन शुभांशु शुक्ला की सकुशल वापसी पर खुशी जताते हुए उनके अंतरिक्ष से धरती पर लौटने की इस यात्रा को मील का पत्थर बताया है।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा- “मैं पूरे देश के साथ ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का स्वागत करता हूं, जो अपने ऐतिहासिक अंतरिक्ष मिशन से पृथ्वी पर लौट आए हैं। अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का दौरा करने वाले भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री के रूप में, उन्होंने अपने समर्पण, साहस और अग्रणी भावना से करोड़ों सपनों को प्रेरित किया है। यह हमारे अपने मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन गगनयान की दिशा में एक और मील का पत्थर है।”

पृथ्वी के वातावरण में वापसी के दौरान 18 मिनट का डी-ऑर्बिट बर्न हुआ, जो प्रशांत महासागर के ऊपर हुआ। इस दौरान यान ने पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकलने की प्रक्रिया शुरू की। अंतरिक्ष यान के वायुमंडल में प्रवेश करने के दौरान करीब सात मिनट तक यान से संपर्क टूट गया था। इसे ब्लैकआउट पीरियड कहा जाता है। ऐसा तब होता है, जब यान तेज गति और गर्मी के कारण सिग्नल नहीं पकड़ पाता। इस समय यान को करीब 1,600 डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी का सामना करना पड़ा।

अंतरिक्ष स्पेस स्टेशन पर अपने दो सप्ताह से अधिक के प्रवास के दौरान शुभांशु शुक्ला ने कुल 310 से ज्यादा बार पृथ्वी की परिक्रमा की और लगभग 1.3 करोड़ किलोमीटर की दूरी तय की। गौरतलब है कि यह दूरी पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी से 33 गुना अधिक है। इस यात्रा में चालक दल ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से 300 से ज्यादा सूर्योदय और सूर्यास्त देखे। ये दृश्य पृथ्वी की तेज परिक्रमा के कारण संभव हो सके।

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