अपने समय की सफलतम फिल्म ‘शोले’ की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर इटली के इल सिनेमा रिट्रोवाटो फेस्टिवल में इस फिल्म का अनकट वर्जन का वर्ल्ड प्रीमियर होगा।

‘शोले’ 15 अगस्त 1975 में रिलीज हुई थी और इस साल फिल्म के पचास साल पूरे होने वाले हैं। फिल्म की 50वीं वर्षगांठ पर इटली के बोलोग्ना में होने वाले इल सिनेमा रिट्रोवाटो फेस्टिवल में फिल्म को एक खास जश्न मनाया जाएगा। उससे पहले 27 जून को इल सिनेमा रिट्रोवाटो फेस्टिवल में फुल रिस्टोर और अनकट वर्जन के साथ ‘शोले’ का वर्ल्ड प्रीमियर होगा। सिनेमा रिट्रोवाटो फेस्टिवल में होने वाली स्क्रीनिंग में दर्शक पहली बार 1975 की क्लासिक फिल्म ‘शोले’ का ओरिजिनल, अनकट वर्जन देख सकेंगे। बताते चलें कि इसमें पहले से हटाए गए सीन और फिल्म का शानदार समापन भी शामिल है।
‘शोले’ फिल्म को 1999 में बीबीसी इंडिया ने ‘मिलेनियम की फिल्म’ का नाम दिया।फिल्म को 2002 के ब्रिटिश फिल्म इंस्टीट्यूट पोल में अब तक की सबसे महान भारतीय फिल्म के रूप में सराहा है। बताते चलें कि मुंबई के मिनर्वा सिनेमा में यह फिल्म लगातार पांच वर्षों तक चली थी।
सिप्पी फिल्म्स के शहजाद सिप्पी ने 2022 में ‘शोले’ के रिस्टोर के बारे में फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन के साथ चर्चा शुरू की थी। उस समय उन्होंने इस बात के संकेत दिए थे कि मुंबई के एक गोदाम में फिल्म के कुछ एलिमेंट्स रखे गए थे। उन्होंने इसे हेरिटेज फाउंडेशन को सौंपने के बारे में अपनी इच्छा व्यक्ते की। आखिरकार हेरिटेज फाउंडेशन ने वर्षों बाद इसकी पड़ताल की, जिसमें उन्हें फिल्म के 35 मिमी कैमरे और साउंड निगेटिव मिले।
सलीम खान और जावेद अख्तर द्वारा लिखी इस फिल्म में अमिताभ बच्चन, धर्मेन्द्र, हेमा मालिनी, संजीव कुमार, जया बच्चन और अमजद खान की अदाकारी थी। फिल्म को रमेश सिप्पी ने निर्देशित किया था और आर डी बर्मन ने इसका संगीत तैयार किया था।
शोले की बदौलत देश में पहली 70 मिमी फिल्म और स्टीरियोफोनिक साउंड वाली पहली हिंदी फिल्म की भारतीय सिनेमा में तकनीकी प्रगति की शुरुआत हुई। बताते चलें कि यह फिल्म सर्जियो लियोन की ‘वन्स अपॉन ए टाइम इन द वेस्ट’, अकीरा कुरोसावा की ‘सेवन समुराई’ और जॉन स्टर्गेस की ‘द मैग्निफिसेंट सेवन’ समेत पश्चिमी क्लासिक्स से इंस्पायर थी।
इस फिल्म को 1999 में बीबीसी इंडिया ने ‘मिलेनियम की फिल्म’ का नाम दिया।फिल्म को 2002 के ब्रिटिश फिल्म इंस्टीट्यूट पोल में अब तक की सबसे महान भारतीय फिल्म के रूप में सराहा है। बताते चलें कि मुंबई के मिनर्वा सिनेमा में यह फिल्म लगातार पांच वर्षों तक चली थी।



















