ग़ाज़ा में अन्तरराष्ट्रीय स्थरीकरण बल की स्थापना को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंज़ूरी मिल गई है। मंज़ूरी के साथ अब ग़ाज़ा में व्यवस्था बहाल की जाएगी, आम लोगों को सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी और सहायता व पुनर्निर्माण के विशालकाय कार्य के लिए एक नया रास्ता खुलेगा।

परिषद ने यह स्वीकृति, संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा समर्थित उस प्रस्ताव को पारित करके दी है जिसके प्रावधानों के तहत ग़ाज़ा में व्यवस्था बहाल की जाएगी। सोमवार को प्रस्तुत किए गए इस प्रस्ताव संख्या 2803 (2025) के समर्थन में 13 वोट पड़े और विरोध में एक भी वोट नहीं पड़ा। इस प्रस्ताव में चीन और रूस ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। हालाँकि इस तरह की आशंकाएँ व्यक्त की जा रही थीं कि रूस इस प्रस्ताव के विरोध में अपने वीटो का प्रयोग कर सकता है, मगर ऐसा नहीं हुआ।
संयुक्त राज्य अमरीका के प्रतिनिधि माइक वॉल्ट्ज़ ने आगे कहा कि इस प्रस्ताव का पारित होना, विशेष रूप में दो बातों के लिए बहुत अहम है – एक स्थिर ग़ाज़ा के लिए जो ख़ुशहाल बन सकेगा और एक ऐसे माहौल के लिए, जिसमें इसराइल सुरक्षा के साथ रह सकेगा।
प्रस्ताव पर मतदान के बाद संयुक्त राज्य अमरीका के प्रतिनिधि माइक वॉल्ट्ज़ ने कहा, “मध्य पूर्व में इसराइलियों व फ़लस्तीनियों के लिए, और पूरे क्षेत्र के लोगों के लिए, एक नया मार्ग तलाश करने में शामिल होने के लिए आपका शुक्रिया।” इसे एक ऐतिहासिक व निर्माणकारी प्रस्ताव क़रार देते हुए संयुक्त राष्ट्र में अमरीका के स्थाई प्रतिनिधि राजदूत माइक वॉल्ट्ज़ ने सुरक्षा परिषद में बैठे राजदूतों को धन्यवाद दिया और इस प्रस्ताव को मध्य पूर्व क्षेत्र को एक नई दिशा देने वाला बताया।
ग़ाज़ा में एक अस्थाई प्रशासन और पुनर्निर्माण प्रयासों का समन्वय करने के लिए यूएन सुरक्षा परिषद द्वारा पारित प्रस्ताव में एक शान्ति बोर्ड (Board of Peace) के गठन का भी प्रावधान है। पारित प्रस्ताव, शान्ति बोर्ड को एक अस्थाई अन्तरराष्ट्रीय स्थरीकरण बल के गठन का अधिकार देता है, जिसे एक ऐसे एकीकृत कमान के तहत तैनात किया जाएगा, जो शान्ति बोर्ड को स्वीकार्य हो।
इस योजना के प्रथम चरण में युद्धविराम लागू करने, बन्धकों व बन्दियों की रिहाई किए जाने, और इसराइल सेनाओं की आंशिक वापसी व मानवीय सहायता में बढ़ोत्तरी का प्रावधान किया गया है।
दूसरे चरण में, हमास से हथियार लिए जाने, इसरायली सेनाओं की वापसी, इसरायली सुरक्षा बलों की तैनाती और शान्ति बोर्ड की निगरानी में एक अन्तरिम सरकार के गठन की व्यवस्था है। जिसके बाद अन्ततः फ़लस्तीनी प्राधिकरण का नियंत्रण होगा।















