बेल्जियम की एक गुफा से वैज्ञानिकों ने 8 साल के निएंडरथल बच्चे के हवाले से एक दुर्लभ जानकारी हासिल की

बेल्जियम में मिली एक युवा निएंडरथल लड़की के जीवाश्म ने हमारे प्राचीन सम्बन्धियों के बारे में हमारी समझ को पूरी तरह बदल दिया है। उसके जीवाश्म बन चुके दांत से अब तक का सबसे पुराना निएंडरथल डीएनए बरामद किया गया है।इस “स्क्लाडिना चाइल्ड” से मिली जानकारी बताती है कि हमारे पूर्वजों में, पूर्व में सोची गई तुलना में कहीं ज़्यादा जेनेटिक विविधता थी। उसके अवशेषों के और विश्लेषण से पता चलता है कि निएंडरथल बच्चों का विकास आधुनिक इंसानों की तुलना में तेज़ी से होता था। ग्रोट स्क्लाडिना की यह अद्भुत खोज हमारे साझा विकासवादी अतीत पर लगातार नई रोशनी डाल रही है।

अंतर्राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, वैज्ञानिकों ने बच्चे की दाढ़ों में से एक से जेनेटिक मटीरियल निकाला। इस से एकत्र जानकारी बताई है कि इसकी उम्र लगभग आठ साल की थी। वह उस इलाके की एक नदी घाटी में पली-बढ़ी जो आज बेल्जियम है। वयस्क होने से पहले ही उसकी मौत हो गई। वह एक निएंडरथल थी। और उसकी मौत के 127,000 साल से भी ज़्यादा समय बाद, उसके जीवाश्म दांत से लिए गए जेनेटिक मटीरियल ने रिकॉर्ड बुक को फिर से लिखने वाला डीएनए बना दिया।

‘करंट बायोलॉजी’ में लुडोविक ऑरलैंडो और उनके सहयोगियों द्वारा प्रकाशित ‘100,000 साल पुराने mtDNA सीक्वेंस के साथ निएंडरथल विविधता की फिर से जांच’ (Revisiting Neandertal diversity with a 100,000 year old mtDNA sequence) नामक एक अहम अध्ययन के अनुसार, शोधकर्ताओं ने स्क्लाडिना दांत से माइटोकॉन्ड्रियल DNA निकाला, जो उस समय तक अध्ययन किया गया सबसे पुराना निएंडरथल जेनेटिक मटीरियल था।

शोध ने पुष्टि की कि निएंडरथल और आधुनिक इंसान न केवल दूर के रिश्तेदार थे, बल्कि यह भी साबित किया कि निएंडरथल के बीच जेनेटिक विविधता को पहले कम करके आंका गया था। पता चला कि निएंडरथल वैसी जेनेटिक रूप से एक जैसी आबादी नहीं थे जैसा कि पहले के शोध में माना गया था।

विकास की यह तेज़ प्रक्रिया स्क्लाडिना लड़की की छोटी ज़िंदगी के बारे में एक खास और मार्मिक जानकारी देती है। इतने मुश्किल माहौल में रहने के कारण, उसके शारीरिक विकास की गति का मतलब था कि उसे बहुत कम उम्र में ही हालात के हिसाब से ढलना था और अपने कबीले को ज़िंदा रखने में मदद करनी थी—इतनी कम उम्र में, जितनी उम्र के आज के बच्चे शायद ही ऐसा कर पाते। उसके जीवाश्म बन चुके दाँतों के इनेमल की हर परत इस मुश्किल सफ़र की गवाह है। यह विकास से जुड़ी एक अहम बात को उजागर करता है, जहाँ आधुनिक इंसानों ने ज़्यादा विकसित दिमाग पाने के लिए अपना बचपन लंबा किया, वहीं निएंडरथल ने अपनी कठोर दुनिया में टिके रहने के लिए तेज़ी से शारीरिक परिपक्वता हासिल करने का रास्ता चुना।

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