बोले सैफ- तैमूर का नाम बदलने का फैसला ले चुका था, करीना ने रोका

मुंबई : सैफ अली खान और करीना कपूर के घर 20 दिसंबर को एक बच्चे का जन्म हुआ। जिसका नाम उन्होंने तैमूर रखा। जैसे ही यह बात लोगों को पता चली उन्होंने एक्टर को और उनके बच्चे को ट्रॉल करना शुरू कर दिया। Saif

Saif

ऐसा लगता है कि यह सवाल आसानी से पटौदी के नवाब का पीछा छोड़ता हुआ नजर नहीं आ रहा है।

अपनी अपकमिंग फिल्म रंगून को लेकर उन्होंने एक लीडिंग डेली को दिए इंटरव्यू में इस मामले पर खुलकर अपनी बात रखी।

जब सैफ से पूछा गया कि क्या अभी भी उनसे पटौदी जूनियर के नाम से संबंधित सवाल पूछे जाते हैं तो उन्होंने कहा- हां, आज भी।

मेरी बेटी ने मुझसे कहा कि आप लोगों को बताते क्यों नहीं हैं कि आपने उसका नाम तिमूर लंग पर नहीं रखा है, बोलिए वो तिमूर था और यह तैमूर है।

मैंने कहा यह दोनों समान लगते हैं। तो उसने कहा दोनों की जड़ें समान हैं। नाम अच्छा है और यह सुनने में अच्छा है। साथ ही इसका मतलब भी अच्छा है लेकिन ये उस शासक के नाम पर नहीं है।

हां नाम समान हैं लेकिन उस शख्स का नाम तिमूर लंग था। संयोग से तिमूर के बेटे का नाम शाहरुख खान है, जिसके बारे में कहा जाता है कि उसने भारत को लूटा था। उसके बेटों के द्वारा काफी लड़ाई की गई लेकिन किसी को भी शाहरुख खान के नाम से कोई आपत्ति नहीं है।

इसके बाद जब सैफ से पूछा गया कि क्या यह मामला अब सुलझ गया है? तो उन्होंने कहा- मुझे लगता है। वहीं मुझे इस बात का अहसास हुआ कि अगर कुछ लोग खुश हैं तो आपको वैश्विक स्वीकृति की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि सभी की स्वीकृति कभी डरा देती है।

मेरे पास चंद लोग ऐसे हैं जिनके नजरिए कि मैं इज्जत करता हूं, वो मुझसे सहमत थे यही काफी है। मुझे वैश्विरक स्वीकृति नहीं चाहिए अगर इसके लिए मुझे ढोंग करना पड़े।

मैं आपका एक बात बताता हूं जो किसी को नहीं बताई है। मैंने एक सेंकेंड के लिए नाम बदलने का मन बना लिया था। कुछ हफ्तो पहले और करीना इसके खिलाफ थी और उन्होंने कहा- लोग तुम्हारे ओपिनियन की वजह से तुम्हारी इज्जत करते हैं और तुम ऐसा नहीं कर सकते।

तो मैंने कहा हां लेकिन यह लोगों के बारे में नहीं है। मैं उसे अलोकप्रिय नहीं बनाना चाहता। और मैं अभी भी सोच रहा हूं कि जब वो एक या दो साल का हो जाएगा तब उसका नाम बदल दूंगा। अभी भी ख्यालों में डूबा हूं कि क्या करुं।

मेरे पीआर में से कुछ मेरी बात से सहमत थे और हमने एक छोटा सा पत्र लिखा। जब मैंने उसे पढ़ा तो वो काफी भावात्मक था तो मैंने आइडिया को कैंसिल कर दिया।

क्योंकि वो ऐसे था ऊहह, आई एम सॉरी, और मैं आपको ठेस नहीं पहुंचाना चाहता था और मैं पागल हूं और आपको बताउं मैंने इसे प्रेशर में लिखा था। यह काफी अजीब लगा।

हालांकि इसे आपने लिखा था मगर यह सही नहीं लग रहा था। ये ऐसे लग रहा था जैसे मुझे अहसास ही ना हो कि मैं कहां रह रहा हूं और क्या कर रहा हूं।

तो मैंने इसपर सोचा और विचार किया लेकिन गलत कारण की वजह से। मुझे लगा कि उसे स्कूल में परेशानी होगी तो मैं उसका नाम अब भी बदल सकता हूं। पर अब देर हो गई है।

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