भारत के हर गांव की सड़कों की पहली बार होगी यूनिक नाम वाली कोडिंग

देश में पहली बार गांवों के अंदर की हर सड़क को कोड और ग्रेड करने के लिए एक स्टैंडर्ड डिजिटल सिस्टम शुरू किया जा रहा है। इस सिस्टम से गांव की कनेक्टिविटी, सर्विस डिलीवरी और आपदा से निपटने के में सुविधा होगी।

इस पहल से एक पूरी डिजिटल रोड रजिस्ट्री बनेगी, ताकि गांव की सड़कों की सही मैपिंग और वर्गीकरण हो सकेगा.पंचायती राज मंत्रालय द्वारा किए जाने वाले इस डिजिटल सिस्टम में सड़क का सही नाम, आकार और कोड दिया जा सकेगा। इससे दमकल गाड़ी, एम्बुलेंस और मेडिकल सप्लाई वाहन जैसी आपात सेवाएं आसानी से और समय पर सुविधापूर्वक निर्धारित स्थान पर पहुंच सकेंगी।

इस संबंध में पंचायती राज मंत्रालय के संयुक्त सचिव बिजय कुमार बेहरा ने जानकारी देते हुए बताया कि इस पहल का उद्देश्य सीधा है, भारत के हर गांव के अंदर हर सड़क का एक यूनिक नाम और कोड होना चाहिए, जो एक साइनबोर्ड पर दिखे, डिजिटल मैप पर ट्रेस हो सके, और एक नेशनल डेटाबेस से जुड़ा हो।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, पंचायती राज मंत्रालय के सलाहकार वी उदय कुमार का कहना है कि इंट्रा-विलेज रोड कोडिंग और ग्रेडिंग सिस्टम पर एक सार्वजनिक परामर्श दस्तावेज तैयार किया गया है, और मंत्रालय नई व्यवस्था को अंतिम रूप देने से पहले नागरिकों, स्थानीय समुदायों और अन्य हितधारकों से सुझाव माँगा है।

मंत्रालय से मिली जानकारी में कहा गया है सड़क की मरम्मत या नए निर्माण की योजना बना रहे सरकारी अधिकारियों के पास परामर्श के लिए कोई भरोसेमंद डेटाबेस नहीं है। दमकल वाहन और पुलिस की गाड़ियों जैसी आपात सेवाएं स्थान ढूंढने में कीमती समय बर्बाद होता हैं। डिजिटल मैप और नेविगेशन एप्लीकेशन गांवों के अंदर अंतिम रास्ते नहीं दिखा पाते हैं। मनरेगा, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, और प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना जैसी योजनाओं को बिना यह जाने कि कौन सी सड़क कौन सी है, अच्छे से ट्रैक या पूरा नहीं किया जा सकता।

मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक़, ग्राम मानचित्र मंत्रालय द्वारा बनाया गया एक जियोस्पेशियल प्लानिंग और मॉनिटरिंग एप्लीकेशन है। यह सेंट्रल डिजिटल प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करेगा, जहां सभी रोड कोड, DIGIPIN कोड, LGD कोड और PMGSY डेटा एक साथ जोड़े जाएंगे। इस सिंगल इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म के माध्यम से अधिकारी, योजनाकार और नागरिक गांव की सड़कों को देख, सर्च और निगरानी कर सकेंगे।

मंत्रालय के आदेश के मुताबिक, फिजिकल रोड साइनबोर्ड पर QR कोड होंगे। साइनबोर्ड पर QR कोड स्कैन करने वाला व्यक्ति ग्राम मानचित्र के जरिये सड़क की जानकारी, मरम्मत रिकॉर्ड और नेविगेशन डेटा देख सकेगा। साथ ही ग्राम पंचायत (गांव परिषद) अपने अधिकार क्षेत्र में सड़कों की पहचान, नामकरण और ग्रेडिंग के लिए मुख्य अधिकारी होगा।

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