इलाहाबाद हाईकोर्ट के हस्तक्षेप और सख्त रुख के बाद, उत्तर प्रदेश में शहरों के भीतर बंदरों को पकड़ने और उनके पुनर्वास की पूरी जिम्मेदारी अब वन विभाग की होगी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद शासन ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया। उम्मीद की जा रही है कि अब जवाबदेही तय होने से बंदरों के आतंक पर लगाम लगाने के लिए धरातल पर काम शुरू हो सकेगा।
यूपी सरकार के नए आदेश के बाद अब शहर में बंदरों के बढ़ते आतंक और इसके समाधान की ज़िम्मेदारी पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग’ को सौंप दी गई है। अभी तक शहर में बंदरों को पकड़ने और उनके निस्तारण की जिम्मेदारी नगर निगम की मानी जाती थी लेकिन अब इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद शासन ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, वाराणसी नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव का कहना है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद शासन ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
इस निर्णय के तहत अब बंदरों के प्रबंधन में बदलाव आने की उम्मीद की जा रही है। गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में विनीत शर्मा व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में पारित आदेशों के क्रम में हाल ही में एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई।
इस बैठक में लिए गए निर्णयों के आधार पर विशेष सचिव, नगर विकास विभाग द्वारा आदेश जारी कर दिए गए हैं। आदेश के मुताबिक बंदरों की समस्या से निपटने के लिए वन विभाग को एक महीने के भीतर एक समेकित कार्ययोजना तैयार कर प्रस्तुत करनी होगी।
शासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि वैसे तो मुख्य जिम्मेदारी वन विभाग की होगी, लेकिन नगर निगम अन्य संबंधित विभाग उन्हें आवश्यकतानुसार पूरा सहयोग प्रदान करेंगे। इस योजना के तहत अब बंदरों को पकड़ने से लेकर उनके पुनर्वास तक की पूरी रूपरेखा शामिल की जाएगी।
बैठक में लिये गए निर्णय के अनुसार भारतीय जीव-जंतु कल्याण बोर्ड द्वारा बंदरों की समस्या के समाधान के लिए जो संशोधित कार्ययोजना सुझाई गई है, वन विभाग उसे भी अपनी योजना में शामिल करेगा।
अभीतक नगर निगम और वन विभाग के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर होने वाली बहस के चलते बंदरों को पकड़ने का काम प्रभावित होता था। ऐसे में उम्मीद है कि यह नया फैसला आमजन के जीवन में बड़ी राहत ला सकेगा।