संयुक्त राष्ट्र माना है कि इतिहास से मिले सबक़ और स्पष्ट क़ानूनी प्रतिबद्धताओं के बावजूद, सशस्त्र टकराव के दौरान आम नागरिकों की रक्षा के लिए तयशुदा दायित्वों की खुली अवहेलना की जा रही है।

इस माह सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष देश ग्रीस के विदेश मंत्री जियॉरजॉस गेरापेट्रिटिस ने बुधवार को सुरक्षा परिषद की बैठक की औपचारिक शुरुआत की। इसमें मानवीय सहायता मामलों में समन्वय के लिए यूएन कार्यालय के प्रमुख टॉम फ़्लैचर ने सुरक्षा परिषद को बताया कि दुनिया भर में आम नागरिकों की संरक्षण व्यवस्था और अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून के प्रति सम्मान दरक रहा है। उन्होंने सचेत किया कि इतिहास से मिले सबक़ और स्पष्ट क़ानूनी प्रतिबद्धताओं के बावजूद ऐसा हो रहा है।
टॉम फ़्लैचर ने 2024 में रिकॉर्ड स्तर पर हुए विस्थापन का उल्लेख किया, जब 12.2 करोड़ लोग जबरन अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर हुए थे। इनमें से अधिकाँश अपने देशों की सीमाओं के भीतर विस्थापित हुए थे।
संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट से पता चला है कि वर्ष 2024 में 14 सशस्त्र टकरावों में 36 हज़ार से अधिक आम नागरिकों की मौत हुई। साथ ही, स्वास्थ्य केन्द्रों, बिजलीघर, जल शोधन संयंत्रों, खाद्य भंडारण केन्द्रों समेत अहम बुनियादी प्रतिष्ठानों को गहरी क्षति पहुँची।
रिपोर्ट से जुड़े कुछ अहम आँकड़े बताते हैं-
28 करोड़ से अधिक आम नागरिकों ने 59 देशों में ऊँचे स्तर पर खाद्य असुरक्षा का सामना किया।
20 देशों में, 870 स्वास्थ्य देखभालकर्मी मारे गए और 900 से अधिक स्वास्थ्य केन्द्र क्षतिग्रस्त या ध्वस्त हुए।
बच्चों ने हिंसा का ख़ामियाज़ा भुगता, और यौन हिंसा के मामलों में भी उछाल दर्ज किया गया।
हिंसा में जान गँवाने लोगों के परिजन के अवसाद, बेचैनी, आत्महत्या सम्बन्धी विचार, मादक पदार्थ, और बीमारी से जूझने के मामले सामने आए।
लिंग-आधारित भेदभाव व उनके सामाजिक दायरे से बाहर रखे जाने से, लड़कियों की शिक्षा पर रोक लगी और महिलाओं की आजीविका व नागरिक जीवन में भागेदारी पर असर हुआ।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा जुटाई गई जानकारी दर्शाती है कि सशस्त्र टकराव के दौरान मृतकों की संख्या बढ़ने के साथ ग़ाज़ा, लेबनान, सूडान, म्याँमार, यूक्रेन इससे सर्वाधिक प्रभावित देश हैं।
आपात राहत मामलों के लिए यूएन अवर महासचिव टॉम फ़्लैचर और महिला सशक्तिकरण के लिए यूएन संस्था की प्रमुख सीमा बहाउस ने इस विषय पर सुरक्षा परिषद की वार्षिक चर्चा को सम्बोधित किया है। इस अवसर पर उन्होंने भारी हथियारों के इस्तेमाल, घातक स्वचालित मशीनों, जैसेकि ड्रोन, समेत अन्य उभरते हुए ख़तरों पर भी ध्यान केन्द्रित किया गया।
आपात राहत प्रमुख के अनुसार, बड़े पैमाने पर जबरन गुमशुदगी, यातना, यौन हिंसा और हिंसक टकराव जनित भूख की ख़बरें मिल रही हैं, स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों पर निरन्तर हमले हो रहे हैं, जबकि ज़रूरतमन्द आबादी तक मानवीय सहायता पहुँचाने पर पाबन्दियाँ थोपी गई हैं।
OCHA के शीर्ष अधिकारी ने ध्यान दिलाया कि मानवीय सहायताकर्मियों के लिए पिछला वर्ष जानलेवा साबित हुआ, और 360 से अधिक मानवतावादियों की जान गई. ग़ाज़ा में कम से कम 200 और सूडान में 54 लोग मारे गए। अधिकाँश मृतक स्थानीय कर्मचारी थे।












