जेवर एयरपोर्ट निर्माण पर मुआवजे को लेकरअब भी प्रदर्शन जारी

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित जेवर इलाके में सरकार इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने की तैयारी में है. लेकिन इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए अधिग्रहण की जा रही जमीन के बदले मिलने वाले मुआवजे को लेकर किसान व जिला प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं. जिसके चलते किसान सर्किल रेट के हिसाब से चार गुना मुआवजा दिए जाने के साथ सरकारी नौकरी भी मांग रहे हैं. साथ ही किसानों की मांग है कि 20 फीसदी जमीनों को 50 फीसदी तक विकसित करके दिया जाए.


किसानों की मांग के चलते 10 दिन पहले पुलिस ने किसानों के प्रदर्शन के दौरान 41 किसानों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. 13 दिन से जेल में बंद इन किसानों को छोड़ने की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को ईकोटेक-1 थाने पर जमकर हंगामा किया था. जिसके बाद शुक्रवार को किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल जेल में बंद किसानों से मिलने के लिए राकेश टिकैत के साथ पहुंचा.

 

राजधानी दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा के जेवर में बनने वाले इंटरनेशनल एयरपोर्ट में जिन किसानों की जमीन अधिग्रहण की जा रही है, उन किसानों में से कुछ किसान अपनी मांगों को लेकर लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. धरना प्रदर्शन को खत्म करने के लिए जिला प्रशासन ने कई बार कोशिश की लेकिन किसान अपनी मांगों पर अड़े रहे.

41 किसानों को भेजा गया जेल

बीते दिनों जब प्राधिकरण की टीम किसानों से उनकी जमीन पर कब्जा लेने पहुंची, तब किसान, प्राधिकरण और पुलिस के बीच हल्की नोकझोंक हुई थी. जिसके बाद पुलिस ने 41 किसानों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. किसानों के जेल जाने के बाद भी किसानों के बाकी साथियों ने धरना प्रदर्शन खत्म नहीं किया. किसान साथियों को छुड़ाने सहित जमीन के बदले मिलने वाला मुआवजा को सर्किल रेट के हिसाब से 4 गुना दिए जाने के साथ एक सरकारी नौकरी की मांग को लेकर अब भी प्रदर्शन पर हैं.

किसानों की अनदेखी का आरोप

जिला प्रशासन ने जब किसानों की बातें नहीं मानी तो गुरुवार देर शाम सैकड़ों किसान जमा होकर ईकोटेक-1 थाने पर पहुंच गए और जमकर हंगामा किया. किसानों के हंगामे को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी मौके पर पहुंच गया और किसानों को मनाने की कोशिश की. किसान नेता राकेश टिकैत का कहना है कि किसानों की अनदेखी कर उनकी जमीन छीनने का काम जिला प्रशासन कर रहा है जिसका वह विरोध कर रहे हैं. राकेश टिकैत का कहना है कि जब तक उनकी मांगे नहीं मानी जाती हैं वे जमीन पर प्राधिकरण को कब्जा नहीं करने देंगे.

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