राजा महमूदाबाद समेत कई धर्म के कई परिवार शत्रु संपत्ति कानून की ज़द में

लखनऊ : संसद में शत्रु संपत्ति कानून संशोधन बिल पारित हो गया। इस बिल के चलते कई परिवारों पर इसका असर पड़ने वाला है। अकेले  उत्तर प्रदेश में  ही कम से कम 1,500 संपत्तियां इस बिल से प्रभावित होंगी । Raja

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राजा महमूदाबाद के पास उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में कुल 936 संपत्तियां हैं जो की इस विधेयक के पास होने से राजा महमूदाबाद के पास से जा सकती हैं ।

इस अधिनियम के बन जाने के बाद सभी ‘शत्रु संपत्तियों’ का नियंत्रण केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त संरक्षकों के पास चला जाएगा।

 फिलहाल इस बिल को आगे की प्रक्रिया के लिए विधि निर्माण शाखा के पास भेजा जाएगा। मुंबई स्थित मुख्यालय से दिशा निर्देश जारी होने के बाद ही संरक्षकों की भूमिका शुरू हो सकेगी।

ज्ञात हो कि राजा महमूदाबाद की साल 2005 में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद उनकी कई संपत्तियां उन्हें सौंप दी गई थीं। फिर 2010 में शत्रु संपत्ति अध्यादेश के ऐलान के बाद फिर से इन संपत्तियों का अधिकार सरकारी संरक्षक के पास चला गया। इस फैसले के खिलाफ राजा महमूदाबाद ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया ।

उन्होंने इस अध्यादेश को भारतीय संविधान के बुनियादी अधिकारों के खिलाफ बताते हुए इसके खिलाफ अपील की। बिल पर प्रतिक्रिया करते हुए राजा महमूदाबाद की ओर से कहा गया , ‘सरकार इस बिल को पारित करवाने की जल्दी में थी।

इसका मकसद समाज के एक विशेष धड़े को खुश करना है। समाज का एक खास तबका कुछ विशेष किस्म के हिंदुत्व विचार रखता है, लेकिन बहुसंख्यक आबादी इन विचारों से सहमति नहीं रखती। अब केवल न्यायपालिका में ही मेरा भरोसा बचा है।

राजा महमूदाबाद के पिता साल 1957 में पाकिस्तान कुछ रोज़ के लिये  चले गए थे, लेकिन उनकी मां रानी कनीज आबिद और खुद वह पाकिस्तान ना जाकर भारत में ही रह गए।

उन्होंने भारत की अपनी नागरिकता को भी नहीं छोड़ा। 1965 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा , तब शत्रु संपत्ति (निगरानी और पंजीकरण) आदेश 1962 जारी किया गया।

1973 में वर्तमान राजा महमूदाबाद के पिता की लंदन में मौत हो गई और उनको ईरान मे दफन किया गया. पिता की मौत के बाद भारत में स्थित उनकी पूरी संपत्ति का अधिकार वर्तमान राजा महमूदाबाद को मिल गया।

उनका दावा है कि वह भारतीय नागरिक हैं और इसके कारण उनके पुश्तैनी जायदाद पर उनका कानूनी अधिकार है। दिलचस्प बात यह भी है कि देश की उच्चतम अदालत ने उनके इस अधिकार को स्वीकार भी किया और उनको एक बार फिर सम्पतियों पर क़ब्ज़ा मिल गया लकिन यह सफलता कुछ ही साल रही और २०१० में   पूरी सम्पतियों पर फिर  अदालती ताला डाल दिया गया ।

उधर मुस्लिम समाज का कहना है कि जब देश की सब से बड़ी अदालत ने 2005 में राजा के हक़ में फैसला कर दिया तो पांच बार आर्डिनेंस लाकर क़ानून बनाना मुस्लिम परिवारों को निशाना बनाने से अधिक कुछ नहीं।

खबरों के अनुसार, फिल्म स्टार और नवाब मंसूर अली खान पटौदी के बेटे सैफ अली खान की भोपाल स्थित संपत्ति पर भी इस बिल का असर पड़ सकता है।

मंसूर अली खान पटौदी की मां साजिदा सुल्तान बेगम भोपाल के नवाब हमीदुल्लाह खान की छोटी बेटी थीं। हमीदुल्ला खान की केवल दो बेटियां ही थीं। उनकी बड़ी बेटी आबिदा सुल्तान 1950 में पाकिस्तान जाकर बस गई थीं।

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