राधाकिशन दमानी लॉकडाउन के दौरन अमीर होने वाले एकमात्र भारतीय

एकमात्र भारतीय टाइकून जिसकी कुल संपत्ति दुनिया भर में घातक कोरोनवायरस वायरस के के संकट के दौर में भी बढ़ रही है।


एवेन्यू सुपरमार्ट्स लिमिटेड को नियंत्रित करने वाले राधाकिशन दमानी की निवल संपत्ति इस साल 5% बढ़कर $ 10.2 बिलियन हो गई है, एवेन्यू सुपरमार्ट्स के शेयर, जो दमानी की कुल संपत्ति का लगभग सभी योगदान करते हैं, इस वर्ष 18% उन्नत हुए हैं।

 

ऐसे दौर में जब मुकेश अंबानी से लेकर अजीम प्रेमजी, उदय कोटक और सुनील मित्तल जैसे दिग्गज कारोबारियों की संपत्ति में कमी देखने को मिल रहा है, तब रिटेल इंडस्ट्री के दिग्गज राधाकिशन दमानी लगातार ग्रोथ कर रहे हैं। ब्लूमबर्ग के बिलिनियर्स इंडेक्स के मुताबिक मुकेश अंबानी दुनिया के ऐसे 5वें शख्स हैं, जिनकी संपत्ति में इस साल सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली है।

यही नहीं पिछले ही दिनों एशिया के सबसे अमीर शख्स का तमगा भी उनसे छिन गया। अब चीन के कारोबारी और अलीबाबा के संस्थापक जैक मा एशिया के सबसे रईस शख्स हैं। सुपरमार्केट चेन डी-मार्ट के मालिक और संस्थापक राधाकिशन दमानी हाल ही में देश के अमीरों की रैंकिंग में दूसरे स्थान पर आए थे।

 

फिलहाल राधाकिशन दमानी 10.1 अरब डॉलर की संपदा के मालिक हैं। एक तरफ दमानी की संपत्ति में इस साल लगातार इजाफा देखने को मिला है तो मुकेश अंबानी की संपदा 32 फीसदी तक कम हो गई है। दरअसल मुकेश अंबानी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ग्रुप का तेल कारोबार में बड़ा दखल है और इस साल की शुरुआत से ही क्रूड ऑइल की कीमतों में गिरावट के चलते उन्हें बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है।

 

इस साल 18 अरब डॉलर घटी अंबानी की पूंजी: मुकेश अंबानी की संपत्ति फिलहाल 40 अरब डॉलर है, जबकि इस साल की शुरुआत में वह 58 अरब डॉलर की पूंजी के मालिक थे। राधाकिशन दमानी की संपदा 10.1 अरब डॉलर है।

मार्क जुकरबर्ग और वॉरेन बफे की संपत्ति भी घटी: वैश्विक स्तर पर बात करें तो इस कैलेंडर ईयर की शुरुआत से अब तक फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग और दिग्गज निवेशक वॉरेन बफे की संपत्ति में भी तेज गिरावट आई है। जुकरबर्ग की संपत्ति इस साल अब तक 18.9 अरब डॉलर कम हो चुकी है, जबकि वॉरेन बफे की संपत्ति में 19.1 अरब डॉलर की कमी देखी गई है।

वापस नहीं लौट सकते अपने देश
इस याचिका को गुरुवार सुबह तक 50,000 लोग साइन कर चुके थे और इसे 18 अप्रैल तक 1,00,000 दस्तखत की जरूरत है। देश की इकॉनमी के मौजूदा हालात को देखते हुए इस समयसीमा को 180 दिन बढ़ाने की अपील की गई है। इन लोगों की परेशानियां इसलिए भी बढ़ चुकी हैं क्योंकि भारत जैसे देशों में लॉकडाउन घोषित किया जा चुका है और अब अमेरिका गए लोग वापस भी नहीं आ सकते।

शोषण का होते हैं शिकार
हावर्ड यूनिवर्सिटी के प्रफेसर रॉन का कहना है कि नौकरियों की कमी के दौरान H-1B वीजा धारकों को और ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वे किसी भी तरह की नौकरी करना स्वीकार कर लेते हैं, ऐसे में शोषण का शिकार होते हैं। हालांकि, दूसरी ओर एक चिंता यह भी है कि पहले से कम पड़ रहीं नौकरियों में अगर बाहर के लोगों का वीजा बढ़ाकर मौका दिया जाएगा, तो अमेरिकी लोगों को नौकरी की दिक्कत हो जाएगी।

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