ईरानी सरकार ने पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के मौके पर 6 जुलाई को पूरे ईरान में सार्वजानिक अवकाश घोषित किया गया है। ईरानी सरकार के एक प्रवक्ता के मुताबिक, 8 जुलाई को भी पूरे देश में शोक का दिन मनाया जाएगा।
अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में डेढ़ से दो करोड़ लोगों की भागीदारी की उम्मीद है। ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम और तिथियों का विवरण इस तरह है-
4 और 5 जुलाई: तेहरान के ग्रैंड मुसल्ला (Grand Mosalla) में पार्थिव शरीर को आम जनता के अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा।
6 जुलाई: तेहरान में मुख्य जनाजा निकाला जाएगा, जिसे लेकर पूरे ईरान में सार्वजनिक अवकाश (Public Holiday) रहेगा।
7 जुलाई: शव को शिया शिक्षा के मुख्य केंद्र, कोम (Qom) शहर ले जाया जाएगा।
9 जुलाई: खामेनेई के गृहनगर मशहद (Mashhad) के इमाम रजा श्राइन में उन्हें राजकीय सम्मान के साथ दफनाया जाएगा।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 4 से 9 जुलाई के बीच होने वाले समारोह में शामिल होने के लिए औपचारिक निमंत्रण भेजा था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत की ओर से विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन अंतिम संस्कार में शामिल होंगे। ईरान पर इसराइल और अमरीकी हमलों से ठीक दो दिन पहले भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसराइल की यात्रा पर थे।
प्रधानमंत्री इस बीच अन्य यात्राओं में व्यस्त है। याद दिला दें कि वह 2016 में ईरान की आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा पर गए थे। उस समय उन्होंने अयातुल्ला खामेनेई और तत्कालीन राष्ट्रपति हसन रूहानी से मिलकर चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें अफगानिस्तान भी शामिल था।
समारोहों में राजधानी तेहरान में 15 से 20 मिलियन (डेढ़ से दो करोड़) से अधिक लोगों की संभावित भागीदारी को देखते हुए तैयारियां की जा रही हैं। ईरान के शहीद नेता सुप्रीम लीडर अली खामेनेई 28 फरवरी को ईरान पर अमरीकी हमले में शहीद हो गए थे। 86 वर्षीय खामेनेई को मार्च में सुपुर्द-ए-खाक होना था लेकिन उस समय चल रहे युद्ध के कारण इसे टाल दिया गया।