प्रधानमंत्री मोदी जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय के निमंत्रण पर दो दिवसीय यात्रा पर सोमवार को अम्मान पहुंचे। तीन देशों की आधिकारिक यात्रा पर भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीती शाम को जॉर्डन पहंचे। इस दौरे में दो दिन जॉर्डन के बाद प्रधानमंत्री इथियोपिया और ओमान भी जाएंगे।

गौरतलब है कि जॉर्डन दुनिया के उन देशों में से है जिनसे स्वतंत्र देश के रूप में भारत ने शुरुआती दौर में राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। यही कारण है कि चार दिन के इस यात्रा में जॉर्डन दौरे को ख़ास महत्व दिया जा रहा है क्योंकि जॉर्डन से भारत के राजनयिक संबंधों को 75 साल हो गए हैं। इस अरब देश में 17,500 से अधिक लोगों का एक सशक्त भारतीय समुदाय भी रहता है, जो भिन्न क्षेत्रों में कार्यरत है।
इस यात्रा में क्राउन प्रिंस अल हुसैन बिन अब्दुल्ला II आज खुद कार चलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जॉर्डन म्यूजियम ले गए। क्राउन प्रिंस पैगंबर मोहम्मद की 42वीं पीढ़ी के सीधे वंशज हैं।
जॉर्डन भारत को उर्वरकों, जिनमे खासकर फॉस्फेट और पोटाश का प्रमुख आपूर्तिकर्ता भी है। जॉर्डन के बाद प्रधानमंत्री मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा के दूसरे चरण में इथियोपिया जाएंगे।
सोमवार को भारत और जॉर्डन ने द्विपक्षीय संबंधों और मित्रता को बड़ा प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से संस्कृति, रिन्यूएबल एनर्जी, वॉटर मैनेजमेंट, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और पेट्रा और एलोरा के बीच “ट्विनिंग” अरेंजमेंट के क्षेत्रों में मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoUs) पर साइन किए। इसका मकसद दोनों देशों के रिश्तों और दोस्ती को मज़बूत करना है।
भारत और जॉर्डन के बीच व्यापार और आर्थिक संयुक्त समिति की व्यवस्था 1976 से चल रही है, जो नियमित रूप से व्यापारिक मुद्दों पर चर्चा करती है। दोनों देशों के बीच उर्वरक क्षेत्र में विशेष सहयोग है। जॉर्डन फॉस्फेट माइनिंग कंपनी (जेपीएमसी) और भारतीय कंपनियों जैसे इफ़्को के बीच बड़े पैमाने पर संयुक्त परियोजनाएं चल रही हैं।
दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध भी दशकों से मजबूत रहे हैं। भारत और जॉर्डन के बीच 1950 में पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित हो गए थे। दोनों देशों के बीच सहयोग और मैत्रीपूर्ण संबंधों के लिए पहला द्विपक्षीय समझौता 1947 में हुआ था।
भू-राजनैतिक रूप से जॉर्डन एक महत्वपूर्ण देश है जो सऊदी अरब, सीरिया, इराक और फ़लस्तीन से जुड़ा है, जबकि अकाबा की खाड़ी में मिस्र के साथ यह समुद्री सीमा से संपर्क में है।
जॉर्डन में लगभग बीस लाख फ़लस्तीनी शरणार्थी रहते हैं। सीरिया में गृहयुद्ध शुरू होने के बाद से, वहां से भी जॉर्डन में लगभग 14 लाख सीरियाई शरणार्थी पहुंचे। जिससे यहाँ के संसाधनों और बुनियादी ढांचे पर काफ़ी दबाव है।
किंग अब्दुल्ला द्वितीय 1999 सेजॉर्डन के शासकके पद पर हैं। व्यापक शक्तियां रखने वाले किंग सरकारें नियुक्त करते हैं, क़ानून को मंज़ूरी देते हैं और संसद को भंग करने की शक्ति भी उनके पास है।
विश्लेषकों के अनुसार भारत और जॉर्डन के आर्थिक संबंध व्यापारिक आंकड़ों से अधिक लोगों और आवश्यक संसाधनों पर आधारित हैं। जॉर्डन की राजधानी अम्मान में भारतीय दूतावास के अनुसार पिछले कुछ सालों में वैश्विक आर्थिक मंदी के बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार में बढ़ोत्तरी देखी गई है और भारत, जॉर्डन का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनकर उभरा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, वित्त वर्ष 2023-24 में भारत-जॉर्डन द्विपक्षीय व्यापार 2.875 अरब अमेरिकी डॉलर का था, जिसमें भारत का जॉर्डन को निर्यात 1.465 अरब अमेरिकी डॉलर था और आयात 1.411 अरब अमेरिकी डॉलर था।















