उत्तर प्रदेश में 15 साल बाद होने वाली जनगणना की तयारी ज़ोरों पर

भारत की जनगणना 2027 को सफल और प्रभावी ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रदेशभर में तैयारियां ज़ोर पकड़ रही हैं। बुधवार को नगर निगम लखनऊ मुख्यालय में फील्ड ट्रेनर्स के लिए एक रिफ्रेशर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य पहले दिए गए प्रशिक्षण को दोहराना और जनगणना से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों को और बेहतर तरीके से समझाना था।

उत्तर प्रदेश में पिछली जनगणना साल 2011 में हुई थी। उस समय राज्य की कुल आबादी लगभग 19.98 करोड़ थी। अब 15 साल बाद सूबे की जनगणना की तैयारी शुरू हो गई है। जनगणना 2027 के पहले चरण की तैयारी के संबंध में अफसरों को दिशा निर्देश दे दिए गए थे। यह तैयारी 10 अप्रैल तक पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, बुधवार को मुख्य सचिव एसपी गोयल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी मंडलायुक्तों एवं जिलाधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा की। इस बैठक में जनगणना 2027 के प्रथम चरण में राज्य में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना कार्य की तैयारियों पर चर्चा की गई। देश के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में उपस्थित रहे। उन्होंने कार्यान्वयन के संदर्भ में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

बैठक में घनी शहरी, झुग्गी एवं उच्च गतिशील आबादी वाले क्षेत्रों में पूर्ण एवं सटीक गणना सुनिश्चित किए जाने की बात मुख्य सचिव ने कही। करीब 5.5 लाख गणना करने वालों एवं पर्यवेक्षकों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए उन्होंने 10 अप्रैल तक उनके सत्यापित विवरण सहित अपडेट डिजिटल डेटाबेस तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, उत्तर प्रदेश में स्व-गणना पोर्टल 7 मई से 21 मई 2026 तक उपलब्ध रहेगा, जिस पर कोई भी नागरिक अपने परिवार की जानकारी स्वयं भर सकेगा। गणना करने वालों एवं पर्यवेक्षकों को फील्ड तैनाती से पूर्व अनिवार्य, समग्र एवं गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण 16 अप्रैल से 7 मई के बीच पूरा कराया जाने की भी बात कही गई है। प्रशिक्षण के लिए सभी व्यवस्थाएं शासनादेश के अनुसार सुनिश्चित की जाएं की बात भी कही गई है।

बैठक में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि मकान सूचीकरण एवं गणना ब्लॉकों का स्पष्ट सीमाओं के साथ सटीक एवं त्रुटिरहित निर्धारण सुनिश्चित की जाए। उन्होंने बताया कि आगामी जनगणना में आम जनता के लिए स्व-गणना का प्रावधान किया गया है।

इस अवसर पर जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि जनगणना के आंकड़े देश के विकास की दिशा तय करते हैं तथा इनसे देश में हुए विकास की सच्ची झलक मिलती है। जनगणना को जन-जन की भागीदारी से जोड़ा जाए तथा इसे एक जन-अभियान बनाया जाए ताकि सटीक आंकड़े प्राप्त हो सकें।

उत्तर प्रदेश में जनगणना 2027 पूरी तरह से डिजिटल होगी, जिसमें सभी डेटा संग्रहण, प्रविष्टि, सत्यापन एवं निगरानी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर होगी। जनगणना के पहले चरण में मकानों की गणना (22 मई से 20 जून 2026) एवं दूसरे चरण (9 फरवरी से 28 फरवरी 2027) में जनसंख्या गणना होगी।

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