नोटबंदी पर संसद में तीसरे दिन भी विपक्ष का हंगामा

नई दिल्ली। नोटबंदी के मोदी सरकार के निर्णय के मुद्दे पर लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष का हंगामा जारी रहा। लोकसभा में लगातार दूसरे दिन विपक्षी सदस्यों ने भारी हंगामा किया और सदन का कार्य स्थगित करके मतविभाजन वाले नियम 56 के तहत तत्काल चर्चा कराने की मांग दोहराई। हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही एक बार के स्थगन के बाद पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गयी। parliament note ban

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वहीं राज्यसभा में नोटबंदी के मुद्दे पर विपक्षी सदस्यों ने प्रधानमंत्री को सदन में बुलाने तथा इस फैसले से उत्पन्न हालात के चलते देशभर में जान गंवाने वाले 70 से अधिक लोगों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने की मांग करते हुए हंगामा किया जिसके कारण राज्यसभा की बैठक को तीन बार स्थगित किया जा चुका है। राज्यसभा की कार्यवाही 2 बजे दोबारा शुरू होगी।

राज्यसभा को पहली बार 11:35 पर दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित किया गया। फिर 12 बजे सदन की कार्यवाही को दोपहर 12:32 तक स्थगित किया गया। जब 12:32 पर सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो विपक्ष के हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही को दो बजे तक स्थगित कर दिया गया। दो बजे भी राज्यसभा की कार्यवाही शुरू नहीं हो सकी और सदन की कार्यवाही को कल तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

जदयू के शरद यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री ने भले ही नोटबंदी का फैसला देश के हित में लिया है लेकिन नोटबंदी के कारण उत्पन्न हालात के चलते देश भर में 70 से अधिक लोगों की जान चली गई है। सरकार की ओर से इन लोगों के परिजन को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए।

बसपा की मायावती ने कहा कि प्रधानमंत्री के फैसले से देश में आर्थिक आपातकाल की स्थिति बन गई है। देश की 90 फीसदी जनता बैंकों के आगे कतार में है। इन लोगों की तकलीफ देखना चाहिए और नोटबंदी के कारण उत्पन्न हालात के चलते अपनी जान गंवाने वाले 70 से अधिक लोगों के परिजन को मुआवजा दिया जाना चाहिए। सपा के नरेश अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री को सदन में आ कर हमारी बात तो सुनना चाहिए। चर्चा से पहले उन्हें सदन में बुलाया जाना चाहिए।

संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि आसन को तत्काल नोटबंदी पर जारी चर्चा को आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने विपक्षी सदस्यों से यह भी कहा कि आपको हमारा पक्ष पहले सुनना होगा और फिर आप अपनी बात रखें। यह नहीं होना चाहिए कि आप अपनी बात कहें और हमारी बात सुने बिना सदन से चले जाएं।

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