प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक में शामिल दोषियों को जल्दी ही कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाने की बात कही है। पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में पिछले 25 दिन से बवाल मचा है। पुलिस द्वारा 20 जुलाई को प्रदर्शन कर रहे छात्रों को पीटे जाने पर यह आंदोलन ज़ोर पकड़ गया है।
प्रधानमंत्री ने यह जानकारी अपने सक्षम मीडिया हैंडल एक्स पर दी। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी के पोस्ट पर रीपोस्ट करते हुजवाब दिया, ‘आपने ही हमारे युवाओं के भविष्य को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचाया है। आपने न सिर्फ हमारी education system पर पूरा कब्ज़ा होने और उसे बर्बाद होने दिया, उसे बढ़ावा भी दिया – और इसके ज़िम्मेदार हर व्यक्ति को संरक्षण दिया।’
राहुल अपनी पोस्ट में छात्रों की मांगें भी लिखते हैं-
1. धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाएं।
2. छात्रों से माफ़ी मांगे।
3. छात्रों के साथ हिंसा करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करें।
प्रधानमंत्री के इस ट्वीट पर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने टिप्पणी करते हुए कहा, ‘भारतीय राजनीति इस बात का सबूत है कि जब भी किसी मंत्री के विभाग में ऐसी स्थिति आती है कि जांच का आदेश देना पड़े या फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाना पड़े… तो आज पीएम मोदी ने सिर्फ़ छोटे-मोटे एजेंटों को सज़ा देने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए हैं। उस मंत्री का क्या, जिसकी देखरेख में 152 बार पेपर लीक हुए? क्या ऐसा अयोग्य और भ्रष्ट मंत्री सत्ता में बना रहेगा? रावण में भी ऐसा अहंकार नहीं था…’
काक्रोच जनता पार्टी के प्रदर्शन पर समाजवादी पार्टी सांसद राम गोपाल यादव ने भी अपनी बात रखी है। उनका सवाल है, ‘इनके(भाजपा) कार्यकाल में कितने पेपर लीक हुए हैं और कितनों के खिलाफ कार्रवाई हुई है? अभी तक किसी को कोई सजा हुई है?…’
जंतर मंतर पर बच्चों पर लाठियां बरसाने वालों के हवाले से गोपाल यादव आगे सवाल करते हैं, ‘आप सत्ता में बैठे हैं और जनता आपसे जवाब चाहती है। ये प्रदर्शन कर रहे बच्चे कोई किराए पर लाए नहीं गए हैं… यह तरीका ठीक नहीं है। जो लोग सिविल कपड़ों में बच्चों पर लाठियां बरसा रहे थे, वे लोग कौन थे?