अलग-अलग त्योहार और इन अवसर पर लज़ीज़ पकवान। या फिर आये दिन होने वाली पार्टिया। इसी तरह के स्वादिष्ट खाने को देखकर, जितना चाहो उतना खाने की आदत आपको ज़्यादा खाने की ओर खींचती है। कई मौकों पर ज़्यादा खाना बहुत नुकसानदायक होता है। ज़्यादा खाने से दिमाग और शरीर को नुकसान हो सकता है, जिसके कई लक्षण भी होते हैं।

ज़्यादा खाने का पहला और सबसे ज़रूरी असर दिमाग पर पड़ता है और उसके काम और परफॉर्मेंस में कमी आती है। हालांकि कभी-कभी ज़्यादा खाना कोई समस्या नहीं है, लेकिन समय के साथ इसका सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है।
यूके के जाने-माने जनरल प्रैक्टिशनर और सीनियर क्लिनिकल एडवाइजर डॉक्टर डोनाल्ड ग्रांट का कहना है कि दिमाग पर कई तरह से असर पड़ सकता है, जिससे खाने वाले व्यक्ति और खाने के बीच एक अनहेल्दी और खतरनाक रिश्ता बन सकता है।
उन्होंने मीडिया को बताया कि 2012 की हार्वर्ड स्टडी में पाया गया कि ज़्यादा खाने से दिमाग की परफॉर्मेंस कम हो सकती है और ज़्यादा कैलोरी से इंसुलिन रेजिस्टेंस के अलावा भविष्य में डिमेंशिया (याददाश्त कम होना) का खतरा बढ़ जाता है।
डॉक्टर ग्रांट ने कहा कि इंसुलिन रेजिस्टेंस एक ऐसी कंडीशन है जिसमें सेल्स इंसुलिन हार्मोन पर ठीक से रिस्पॉन्ड नहीं करतीं, जिसके कारण इंसुलिन ब्लड शुगर लेवल को बैलेंस्ड और हेल्दी रेंज में रखने में फेल हो जाता है और इससे ब्लड शुगर लेवल हाई हो सकता है।
उन्होंने कहा कि अगर आपको डायबिटीज नहीं भी है, तो भी इंसुलिन रेजिस्टेंस से डायबिटीज होने का खतरा बढ़ सकता है और अगर पैंक्रियास इस रेजिस्टेंस को दूर करने के लिए काफी इंसुलिन नहीं बना पाता है, तो इससे डायबिटीज हो सकती है।
डॉक्टर ग्रांट के मुताबिक, ज़्यादा खाने से न सिर्फ दिमाग पर असर पड़ता है, बल्कि यह जी मिचलाना, एसिडिटी, सीने में जलन और थकान जैसी दूसरी बीमारियों को भी बुलावा दे सकता है। ज़्यादा कैलोरी से पाचन संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं, जिससे ब्लोटिंग होती है।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक ज़्यादा खाने की आदत से दिल की बीमारी या मोटापे का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, ज़्यादा खाने से ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल लेवल पर बुरा असर पड़ता है और नतीजतन स्ट्रोक और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ जाता है।
डॉकटर डोनाल्ड ग्रांट के अनुसार, ज़्यादा खाने से जुड़े दूसरे खतरों में आंतों के माइक्रोबायोम में गड़बड़ी शामिल है, जिससे बैक्टीरिया का बैलेंस बिगड़ता है, जिससे डाइजेस्टिव सिस्टम में दिक्कतें होती हैं, इसके अलावा डायरिया, स्किन की बीमारियां, डिप्रेशन और एंग्जायटी भी हो सकती है। यह इम्यून सिस्टम को भी कमजोर कर सकता है। डाइजेस्टिव सिस्टम में दिक्कतों की वजह से नींद पर भी असर पड़ता है।














