‘विकसित भारत- जी राम जी बिल’ पहले लोकसभा और फिर देर शाम राज्यसभा से पास हो गया। इस विधेयक को संसद की मंजूरी मिल गई है। दूसरी तरफ इस बिल के पास होने पर नाराज़ विपक्षी सांसदों का प्रदर्शनचल रहा है। विपक्षी दल ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक, 2025’ के पारित होने के बाद संसद परिसर में संविधान सदन के बाहर धरने पर बैठ गए।

राज्यसभा में विधेयक पर छह घंटे से अधिक चर्चा हुई। मनरेगा योजना की जगह नया विधेयक लाने और उसमें से महात्मा गांधी का नाम हटाने को लेकर विपक्ष ने प्रतिरोध जताया है। विपक्ष ने मांग कि बिल को स्थायी समिति को भेजा जाए, लेकिन उसे खारिज कर दी गई।
शुरू से ही इस बिल को लेकर विरोध कर रहे विपक्षी दलों ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर हमला बोला है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा कल रात मोदी सरकार ने एक ही दिन में 20 साल की MGNREGA को तबाह कर दिया।
इन आरोपों को सरकार सिरे से खारिज कर रही है। ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संसद ने गुरुवार देर रात विधेयक पारित होने पर कहा कि ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक, 2025’ के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार महात्मा गांधी के आदर्शों को लागू करने और विकसित गांव की बुनियाद पर विकसित भारत बनाने के लक्ष्य की दिशा में काम कर रही है।
सदन द्वारा इस विधेयक पर विपक्ष के कई सदस्यों की ओर से लाये गये संशोधन प्रस्तावों को नामंजूर कर दिया। चर्चा का जवाब देते हुए चौहान ने कहा कि देश में 1960-61 में ग्रामीण जनशक्ति कार्यक्रम बनने से लेकर मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) तक समय-समय पर विभिन्न योजनाएं बनती रही हैं। उन्होंने कहा कि इनसे उद्देश्य पूरा नहीं होता या थोड़ा ही लक्ष्य पूरा होता है तो नयी योजनाएं लाई जाती हैं।
शिवराज ने कहा कि मोदी सरकार से पहले इस योजना में महिलाओं की भागीदारी 48 प्रतिशत थी, जो इस सरकार के समय 56.73 प्रतिशत हो गई। उन्होंने यूपीए और एनडीए सरकार के समय इस योजना के क्रियान्वयन की तुलना करते हुए कहा कि कांग्रेस के समय जहां 1660 करोड़ श्रम दिवस सृजित हुए थे, वहीं मोदी सरकार में 3210 करोड़ श्रम दिवस का सृजन किया गया।
राहुल गांधी का कहना है कि कि काम की सीमा तय करके और काम से वंचित करने के नए रास्ते बनाकर, VB G RAM G उस एकमात्र औजार को कमजोर करता है जो ग्रामीण गरीबों के पास था। कोरोना के दौरान हमने देखा कि मनरेगा का क्या महत्व था। जब अर्थव्यवस्था ठप हो गई और आजीविकाएं खत्म हो गईं, तब इस योजना ने करोड़ों लोगों को भूख और कर्ज़ में डूबने से बचाया। इस योजना का सबसे बड़ा लाभ महिलाओं को मिला। साल-दर-साल, कुल कार्य-दिवसों में आधे से अधिक योगदान महिलाओं का रहा है। जब किसी रोज़गार योजना को राशनिंग के ज़रिए सीमित किया जाता है, तो सबसे पहले महिलाएं, दलित, आदिवासी, भूमिहीन मज़दूर और सबसे गरीब ओबीसी समुदाय बाहर कर दिए जाते हैं।











