मेघालय में खदान में फंसे खनिकों एक लिए विपक्ष ने की स्वतंत्र जांच की मांग

शिलांग, 01 जून : मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले में 500 फुट गहरे परित्यक्त कोयला खदान में फंसे पांच खनिकों को बचाने के लिए मंगलवार को राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं की एक टीम के प्रयास प्रभावी उपकरणों के अभाव में विफल रहे।

मेघालय में खदान में फंसे खनिकों एक लिए विपक्ष ने की स्वतंत्र जांच की मांग

मेघालय विधानसभा में विपक्ष के नेता डॉ. मुकुल संगमा ने आज राज्य के सभी जिलों में कथित अवैध कोयला खनन की स्वतंत्र जांच और इसमें शामिल लोगों को कड़ी सजा देने की मांग की।


राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के आदेश पर अप्रैल 2014 से मेघालय में अनियमित खदानों में अवैज्ञानिक ‘रैट-होल’ कोयला खनन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, लेकिन प्रतिबंधों को कड़ाई से लागू नहीं किये जाने के कारण इस तरह की अवैध खदानें खुलेआम फल-फूल रहे हैं।


ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले के उपायुक्त ई. खरमलकी ने कहा कि एसडीआरएफ और अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा कर्मियों ने कोयला खदान में कोल पिट के मुख्य शाफ्ट में प्रवेश करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें जिस क्रेन की मदद से भीतर जाना था, वह बंद पड़ गयी।

उन्होंने बताया, “हमने आज अपराह्न क्रेन की मरम्मत की और बचाव दल फंसे हुए लापता लोगों को बचाने के लिए कल कोल पिट के मुख्य शाफ्ट में प्रवेश करेगा।” खदान दुर्घटना 30 मई को हुई, जब कम से कम पांच खनिक राजधानी शिलांग से लगभग 100 किलोमीटर दूर ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले के सुतंगा इलाका के उम्पलेंग क्षेत्र में कोयला खदान में फंस गये। डायनामाइट के अचानक फटने से खदान में पानी का तेज बहाव होने लगा और कुछ ही समय में खदान में पानी भर गया जिसके कारण ये खनिक उसमें फंस गये।

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के आदेश पर अप्रैल 2014 से मेघालय में अनियमित खदानों में अवैज्ञानिक ‘रैट-होल’ कोयला खनन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, लेकिन प्रतिबंधों को कड़ाई से लागू नहीं किये जाने के कारण इस तरह की अवैध खदानें खुलेआम फल-फूल रहे हैं।

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