77वें गणतंत्र दिवस की गणतंत्र दिवस की तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं। इस बार कर्तव्य पथ पर होने वाली जिस झांकी की चर्चा सबसे ज़्यादा है, वह है ‘ऑपरेशन सिंदूर: विक्ट्री थ्रू जॉइंटनेस’।

इसकी विशेषता यह है कि इस बार की झांकी में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के 88 घंटों की पूरी कार्रवाई की झलक देखने को मिलेगी। भारतीय सशस्त्र सेना की ये झांकी भारत की बदलती हुई सैन्य रणनीति और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता का भी प्रतीक है।
भारतीय सशस्त्र सेना की ट्राई-सर्विस झांकी में थल सेना, नौसेना और वायुसेना के आपसी तालमेल और आधुनिक सैनिक ताकत को सरल तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
भारतीय सशस्त्र सेना की झांकी देते हुए एयर कमाडोर मनीष सब्बरवाल ने एनडीटीवी को बताया कि आज ऑपरेशन सिंदूर आज देश के हर लोगों की जुबान पर है। इसी वजह से इसे गणतंत्र दिवस परेड में प्रभावशाली रूप में पेश किया गया हैं।
एयर कमाडोर ने आगे कहा कि भारत पहले भी संयुक्त सैन्य अभियान करता रहा है, लेकिन इस ऑपरेशन में जिस स्तर का तालमेल देखने को मिला, वह अभूतपूर्व है। इसमें नये भारत की झलक मिलती है।
इस झांकी में 88 घंटे की कार्रवाई कोदिखाने के लिए सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के फायर को प्रस्तुत किया गया हैं। इसके अलावा एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की भूमिका को भी दिखाया गया हैं जिसने लंबी दूरी से दुश्मन के हवाई खतरे को खत्म किया।
दुश्मन के ठिकानों को सटीक फायर कर निशाना बनाने के लिए एम-777 तोप अल्ट्रा लाइट तोपों से को भी झांकी में दिखाया गया है। इसके पीछे आकाश एयर डिफेंस सिस्टम भी है, जो देश की मजबूत और मल्टी लेयर हवाई सुरक्षा का प्रतीक है।
राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के प्रदर्शन के लिए झांकी के बीच वाले हिस्से में हारोप ड्रोन और राफेल विमान की स्कैल्प सर्जिकल स्ट्राइक का नज़ारा पेश होगा जो तेज, सटीक और सीमित कार्रवाई पर जोर देने के साथ भारत की आधुनिक युद्ध क्षमता का प्रदर्शन करता है।
