नितीश की लखनऊ में रैली, माया पर जमकर बरसे

लखनऊ। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मायावती के ऊपर जमकर बरसे। महाराजा बिजली पासी किला मैदान पर बीएस-4 के संस्थापक आरके चौधरी द्वारा छत्रपति शाहूजी महाराज की जयंती पर आयोजित रैली को संबोधित कर रहे थे। उन्‍हें वैसे तो रैली स्थल पर दोपहर एक बजे आना था। वह तय समय के अनुसार 12 बजे लखनऊ के वीवीआईपी गेस्ट हाउस पहुंच भी गए थे लेकिन जिला प्रशासन की अनुमति नहीं मिलने की वजह से रैली स्थल पर 3.06 बजे पहुंच सके।

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लंबे समय तक बहुजन समाज पार्टी की राजनीति करने वाले पूर्व मंत्री आरके चौधरी ने विरोधियों को अपनी ताकत का एहसास दिलाने के लिए महाराजा बिजली पासी किला पर एक बड़ी रैली का आयोजन किया। छत्रपति शाहूजी महराज की जंयती पर आयोजित इस रैली में बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार, जदयू के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश निरंजन भैया भी शामिल हुए। उन्होंने प्रदेश भर से बीएस-4 के समर्थकों को इस रैली में आमंत्रित किया था।

आरके चौधरी पूर्व में बनायी गयी पार्टी बीएस-4 को पुनः दौडाने में लगे हुए हैं। इसीलिए उन्होंने इस रैली को अपनी पार्टी के बैनर तले किया। आर के चौधरी ने बताया कि राजधानी में आयोजित इस रैली में प्रदेश भर से सभी समर्थकों को बुलाया गया था। कार्यकर्ताओं के विचार जानने के बाद मिशन 2017 को लेकर भावी रणनीति तय की जायेगी। रैली के जरिये यहां आये दलित समाज को जागरूक कर उसके अधिकारों को दिलाने का काम किया जायेगा। क्योंकि यह समाज आजादी के 70 साल बाद भी अपने मूल अघिकारों से वंचित है। उन्होंने कहा कि यह समाज अब वोट बैंक बनकर नहीं रहेगा बल्कि अपने अधिकारों के लडाई भी लडेगा।

जबकि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार छोटे दलों के सहारे यूपी में अपनी राजनीति चमकाने में जुटे हैं। उन्होंने शराब बंदी के मुद्दे के साथ ही यूपी में पिछड़ों को अपने साथ जोडऩे की मुहिम तेज कर दी है। इसी वजह आज बीएस 4 की तरफ से आयोजित रैली में नीतीश कुमार ने शिरकत की। नीतीश कुमार ने कहा कि आरके चौधरी के निमंत्रण पर मुझे महाराजा बिजली पासी किला में आने का सौभाग्य मिला। बहुजन समाज को अभी और लड़ाई लड़नी है। उन्होंने बिहार में निकायों व पंचायतों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण दिया। लोहिया जी का मानना था कि बहुजन समाज को सभी क्षेत्रों में आरक्षण मिले। उन्होंने कहा कि सबसे पहले आरक्षण छत्रपति शाहूजी महाराज ने दिया। अभी भी सभी क्षेत्रों में आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है। इसका उदाहरण न्यायिक सेवा है। अभी तो लड़ाई शुरू हुई है, हक के लिए लंबी लड़ाई लड़नी होगी।

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