अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर से मातम के माहौल में बदल गया लखनऊ

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के मौत की खबर आते ही राजधानी लखनऊ में बीते दिन शहर का माहौल बदलता गया। रमजान के दिनों में आने वाली यह खबर सहरी के वक्त ही जनता तक पहुँचने लगी। हालाँकि पहली बार में कोई भी इस पर यक़ीन नहीं कर सका, मगर जैसे जैसे इस खबर की पुष्टि हुई लोगों का हुजूम इमामबाड़े की तरफ कूच करने लगा।

अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर से मातम के माहौल में बदल गया लखनऊ

देखते ही देखते सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर बस यही खबर थी और इस खबर से उपजा दुख पूरे शहर ही नहीं, मुल्क ही नहीं दुनियाभर के मुस्लिम विशेषकर शिया समुदाय के घरों में फैलता चला गया।

शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद ने तीन दिवसीय शोक का ऐलान करते हुए व्यापारियों से दुकानें बंद रखने और एकजुटता दिखाने की अपील की। सुन्नी धर्मगुरु मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने भी हमले की निंदा कर ईरान का समर्थन किया है। इस दुखद घड़ी में प्रशासन की ओर से पूरे शहर में सुरक्षा कड़ी का इंतिज़ाम किया गया।

लखनऊ का पुराना इलाक़ा, नख्खास, विक्टोरिया स्ट्रीट, बजाज़ा, गोलागंज, नूरबाड़ी, रुस्तम नगर, कश्मीरी मोहल्ला, कर्बला चौराहा, और हजरत अब्बास रोड के इलाक़ों से आने वाला हुजूम इमामबाड़े की ओर चलने लगा।

भारी संख्या में आदमी, औरतों और बच्चों का हुजूम यहाँ अपने रहबर की याद में ग़म मनाने को शरीक हुआ। दुख में डूबे लोग बड़ा इमामबाड़ा परिसर में फातिहा पढ़ते नारे लगाते रहे।

यह सिलसिला दिनभर जारी रहा मगर इफ्तार के बाद शाम आठ बजे के बाद अयातुल्ला अली खामेनेई के लिए मजलिसें आयोजित की गईं। रात में बड़ा इमामबाड़ा और आसपास के इलाक़ों में एक बार फिर लोग अपने रहबर को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। मौलाना कल्बे जवान ने मजलिस को खिताब किया। इस हुजूम में शिया सुन्नी दोनों समुदाय भरी दिल से एकजुट हुए।

खामेनेई की शहादत के बाद ईरान की सरकारी मीडिया द्वारा ईरान में 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक और 7 दिनों के सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की गई है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने उन्हें ‘इस्लामी क्रांति के शहीदों का सरदार’ घोषित किया है।

खामेनेई की शहादत के बाद अयातुल्लाह अलीरेज़ा अराफी ईरान के अंतरिम सुप्रीम लीडर बनाए गए हैं। ईरानी मीडिया के अनुसार, वरिष्ठ मौलवी अलीरेजा अराफी संवैधानिक प्रक्रिया से खामेनेई के उत्तराधिकारी चुने जाने तक इस पद पर रहेंगे।

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