एनडीए की बैठक सत्ता पाने के लिए नहीं सेवा करने के लिए हो रही है- जेपी नड्डा

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए की आज 38 पार्टियों के साथ बैठक कर रहा है। बीजेपी अध्यक्ष नड्डा इसे शक्ति प्रदर्शन का नाम दे रहे हैं जबकि विपक्ष इन 38 दलों के नाम जानने के साथ इसे भाजपा का डर बता रहा है।

एनडीए की बैठक सत्ता पाने के लिए नहीं सेवा करने के लिए हो रही है- जेपी नड्डा

एनडीए की दिल्ली में होने वाली इस बैठक को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इसे सत्ता पाने के लिए नहीं सेवा करने के लिए की जा रही बैठक बताया है।

बीजेपी अध्यक्ष नड्डा का कहना है कि एनडीए की 25वीं सालगिरह पर होने वाले इस शक्ति प्रदर्शन में 38 पार्टियां शामिल होने जा रही हैं। उन्होंने इसे पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सभी दलों ने रूचि बतायाऔर एनडीए के प्रति उत्साह बताया है।

बीजेपी को अपनी विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध बताते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि जो सहयोगी दल एनडीए से बाहर गए थे, वो भी भारत को मजबूत करने के लिए वापस साथ आ रहे हैं। इसकी सफाई में पार्टी अध्यक्ष का कहना है कि बीजेपी के पूर्व सहयोगियों की कृषि कानूनों और साझेदारों की उपेक्षा के चलते बीते कुछ समय में एनडीए से दूरी बन गई थी। इस मीटिंग को उन्होंने सभी दूरियों को ख़त्म करने का प्रयास बताते हुए भाजपा के प्रति प्रतिबद्धता की बात कही है।

भाजपा अध्यक्ष ने 38 सहयोगी दलों के नामों की जानकारी नहीं दी है। हालाँकि विपक्ष इस पर सवाल उठा रहा है कि भाजपा इन 38 दलों के नामों का खुलासा करे।

भाजपा खेमे से विपक्ष की पार्टी पर बयान देते हुए विपक्षी दलों के गठबंधन को नड्डा ने भानुमती का कुनबा बताया। उन्होंने कहा कि यूपीए भानुमती का कुनबा है। उनके पास न नीयत है, न नीति, न नेता, न फैसले लेने की ताकत।

पार्टी के किसी भी सहयोगी के जाने की बात जेपी नड्डा ने कहा कि हमने उन लोगों के साथ भी सौहार्दपूर्ण व्यवहार किया है जिन्होंने बीजेपी से नाता तोड़ लिया है। आगे उन्होंने कहा कि ”हमारा एजेंडा देश सेवा है, हमने किसी को जाने नहीं दिया। जिन्होंने छोड़ा, हमने उनके साथ मित्रता बरतना नहीं छोड़ा, हमारे लिए व्यापक तस्वीर सबका साथ, सबका विकास है।”

नड्डा ने अपने बयान में आगे कहा कि भाजपा और उसके पूर्व संगठन जनसंघ का ध्यान हमेशा अपनी विचारधारा पर केंद्रित रहा है।

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