बिहार में 52 लाख से ज़्यादा वोटर्स के नाम पर मंडरा रहा है खतरा

बिहार में वोटर लिस्ट सत्यापन के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इन आंकड़ों ने राज्य की मतदाता सूची की गुणवत्ता को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बिहार में 52 लाख से ज़्यादा वोटर्स के नाम पर मंडरा रहा है खतरा

अभियान से पता चला है कि इस परीक्षण में अबतक 18 लाख 66 हजार 869 नाम ऐसे पाए गए हैं जिन्हे मृत घोषित किया जा चुका है। इसके अलावा 26 लाख से अधिक मतदाता किसी अन्य विधानसभा क्षेत्र में स्थानांतरित हो चुके हैं। करीब 7 लाख लोगों ने दो जगहों पर वोटर आईडी बनवाई हुई है। इन सबका योग बताता है कि क़रीब 52 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम काटे जा सकते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला है कि बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार राज्य में कुल 7.89 करोड़ से अधिक निर्वाचक दर्ज थे। मंगलवार 22 जुलाई तक इनमें से 90.67% यानी 7.16 करोड़ से अधिक लोगों ने गणना फॉर्म (EF) जमा किए हैं।

एक स्वच्छ, अपडेटेड और त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार करने के मक़सद से 90.37% फॉर्म का डिजिटाइजेशन भी कर लिया गया है। गौरतलब है कि निर्वाचन आयोग द्वारा पात्र मतदाताओं की ड्राफ्ट सूची पहली अगस्त 2025 को प्रकाशित की जाएगी।

विशेष गहन पुनरीक्षण के अभियान में बिहार के 12 प्रमुख राजनीतिक दलों के जिला अध्यक्षों द्वारा नियुक्त लगभग एक लाख बीएलओ, 4 लाख स्वयंसेवक और 1.5 लाख बीएलए (Booth Level Agents) इस काम में जुटे हुए हैं। इनका उद्देश्य उन मतदाताओं की पहचान और संपर्क करना है, जिन्होंने अबतक अपने गणना फॉर्म जमा नहीं किए हैं या अपने पते पर गैरहाज़िर पाए गए हैं।

21.36 लाख मतदाताओं की सूची साझा की गई है, यह वह नाम हैं जिनके फॉर्म अभी तक जमा नहीं हुए हैं। साथ ही 52.30 लाख मतदाताओं की सूची भी दी गई है, जो या तो मृत हैं या स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके हैं, या एक से ज़्यादा जगह पर इनके नाम दर्ज हैं।

बताते चलें कि, चुनाव आयोग ने इसके लिए प्रत्येक मतदान केंद्र पर सुविधा केंद्र बनाने के साथ ऑनलाइन माध्यम से भी आवेदन की व्यवस्था की है। पहली अगस्त से पहली सितंबर 2025 तक आम नागरिकों को ड्राफ्ट सूची में नाम जोड़ने, हटाने या सुधारने का पूरा मौक़ा दिया जाएगा।

आम लोगों से अपील करते हुए चुनाव आयोग का कहना है कि वे आगामी ड्राफ्ट सूची का अवलोकन करें और यदि किसी प्रकार की त्रुटि हो तो समय रहते उसमें सुधार कराएं। परिक्षण प्रक्रिया के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आगामी चुनावों में कोई फर्जी या मृत मतदाता सूची में शामिल न रहे साथ ही प्रत्येक वोटर को अपने मताधिकार का प्रयोग करने का अवसर मिल सके।

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