मार्क कार्नी कनाडा के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं

कनाडा में मार्क कार्नी चुनाव जीतने के करीब हैं। अगली कनेडियन सरकार उन्ही के नेतृत्व में बनने की बात कही जा रही है। 2025 के कनाडाई संघीय चुनाव में कार्नी की लिबरल पार्टी को जीत मिलने का अनुमान है।

मार्क कार्नी कनाडा के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं

मार्क कार्नी को 159 सीटें मिलने की उम्मीद है, जो बहुमत के करीब है। पियरे पोलीव्रे की कंजर्वेटिव पार्टी के दूसरे स्थान पर आने का अनुमान है। कार्नी के नेतृत्व और सामर्थ्य तथा कनाडाई संप्रभुता पर ध्यान मतदाताओं को पसंद आया। ऐसे में लिबरल पार्टी को छोटी पार्टियों के समर्थन से अल्पमत सरकार बनाने का अनुमान है।

कनाडा में सोमवार को देश का अगला प्रधानमंत्री चुनने के लिए वोट डाले गए हैं। यहां के डॉक्टर मनमोहन सिंह मने जाने वाले मार्क कार्नी के नेतृत्व वाली लिबरल पार्टी और पियरे पोलीवरे की कंजर्वेटिव पार्टी में सीधा मुकाबला था। एक लम्बे अंतराल के बाद लिबरल विचाराधारा की सरकार बनी है और इसे नई व्यवस्था के लिए शुभ संकेत माना जा सकता हैं।

मतदान के बाद आने वाले शुरुआती रुझानों में लिबरल पार्टी ने कंजर्वेटिव पार्टी पर बढ़त बनाई है। कनाडा का ये चुनाव ऐसे समय हुआ है, जब देश में अमरीका के साथ एक तनावपूर्ण माहौल है।

सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी को हाउस ऑफ कॉमन्स में 172 सीटों की जरूरत है। कैनेडियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन के अनुसार लिबरल पार्टी की चुनाव में जीत हो गई है। इस दौरान करीब 2.8 करोड़ कनाडाई लोगों के मतदान किए जाने की सूचना है।

अमरीकी राष्ट्रपति बनने के बाद से डोनाल्ड ट्रंप लगातार कनाडा को अमरीका में मिलाकर उसे देश का 51वां राज्य बनाने की बात कह रहे हैं। चुनाव पर भी इसका व्यापक असर पड़ने की बात मानी गई है।

कनाडा के लोगों ने राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में अपने पड़ोसी देश, संयुक्त राज्य अमरीका और ट्रंप के प्रति कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इससे संयुक्त राज्य अमरीका में परिवहन और पर्यटन पर भी बहुत बुरा असर पड़ा। यहां तक ​​कि सीमा पर अमरीकी और कनाडाई इमिग्रेशन अधिकारियों का व्यवहार में भी बदलाव देखा गया।

लिबरल पार्टी के नेता मार्क कार्नी एक विख्यात अर्थशास्त्री भी है। इसके अलावा मध्यमार्गी विचार वाली राजनीति में यक़ीन रखने वाले मार्क के सामने पॉलीवर दक्षिणपंथी रुझान रखते थे और ट्रम्प समर्थक थे।

क्योंकि एक लम्बे अंतराल के बाद विश्व में लिबरल विचाराधारा की सरकार बनी है और इसे नई व्यवस्था के लिए शुभ संकेत माना जा सकता हैं।

332 मिलियन की जनसंख्या वाले संयुक्त राज्य अमरीका को कनाडा की 40 मिलियन जनसंख्या वाले देश ने अपना जवाब अपने मताधिकार से दिया। कनाडा की जनता में राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा कनाडाई उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाने से कनाडाई अर्थव्यवस्था के लिए भय का माहौल था।

पिछले दस-बारह बरसों से अधिकांश नेता दक्षिणपंथी के चुने जा रहे थे लेकिन अपनी जड़बुद्धि और युद्ध उन्मादी कट्टरपंथी सोंच के कारण असफल रहे।

इस बीच जस्टिन ट्रूडो सेवानिवृत्त हुए और बैंक ऑफ कनाडा तथा बैंक ऑफ इंग्लैंड का नेतृत्व करने वाले लिबरल पार्टी के नेता में मतदाताओं ने उम्मीद देखी। मार्क कार्नी के वादों और बयानों से भयभीत कनाडाई लोगों को आशा मिली और इसका असर चुनाव नतीजों में देखने को मिला।

कंजर्वेटिव पार्टी के नेता पियरे पोलिवोर, जो लंबे समय से संसद के सदस्य भी हैं, आर्थिक स्थिति से निपटने में प्रभावी साबित नहीं हुए।

चुनाव पूर्व होने वाले सर्वेक्षणों से अंदाज़ा हो गया था कि लिबरल पार्टी जनता की लोकप्रियता में आगे चल रही है और 170 से अधिक सीटें जीतेगी।

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