देशभर के विद्युत उपभोक्ताओं के लिए बहुत ही राहत भरी खबर है। यूपी में भी बिजली व्यवस्था में बड़ा बदलाव हुआ है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा प्रीपेड स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है।
अब केवल स्मार्ट मीटर ही लगाए जाएंगे। पूरे देश सहित उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं ने इस खबर के आने के बाद राहत महसूस की है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण प्रीपेड स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने एक आदेश जारी किया है। आदेश के अुनसार, प्रदेश में करीब 78 लाख से ज्यादा स्मार्ट मीटर लगे हैं। इसमें 70 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर हैं। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा आदेश जारी कर दिया गया है। यह आदेश एक अप्रैल को ही अधिसूचित किया गया है।
गौरतलब है कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर का पूरे प्रदेश में जमकर विरोध हुआ है। इससे पहले केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर भी संसद में बयान दे चुके हैं कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं है। उन्होंने यह भी बताया है कि यह उपभोक्ताओं पर निर्भर करता है कि वह लगवाना चाहते हैं या नहीं।
देशभर के विद्युत उपभोक्ताओं ने इस पर भारी विरोध जताया। आखिरकार फैसला उपभोक्ताओं के हक़ में रहा। जारी की गई संशोधित अधिसूचना में कहा गया है कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा इस आदेश में संशोधन कर दिया गया है। नए आदेश के तहत अब पूरे देश में स्मार्ट मीटर तो लगा सकते हैं, लेकिन प्रीपेड मोड केवल उपभोक्ताओं की सहमति के आधार पर ही आगे बढ़ाया जाएगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, निजीकरण के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने आंदोलन तेज करने की तैयारी शुरू कर ली है। रविवार को होने वाली केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में संबंधित निर्णयों पर विमर्श होना है। बताते चलें कि समिति ने प्रबंधन पर कई अन्य आरोप भी लगाए हैं। इनमें संविदा कर्मियों की बड़े पैमाने पर छंटनी शामिल है।
समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि पाॅवर काॅर्पोरेशन प्रबंधन ने अभी तक निजीकरण प्रस्ताव रद्द करने की घोषणा नहीं की है। साथ ही विरोध करने वालों के खिलाफ लगातार उत्पीड़न की बात भी सामने आई है।