विलुप्त हो रही प्रजातियों को संरक्षण देगा लखनऊ में बनेगा पहला जीन बैंक

सूबे की राजधानी लखनऊ में जैव विविधता संरक्षण के लिए जीन बैंक बनाने की मंजूरी दे दी गई है। राजधानी ;लखनऊ में बनने वाला गोमती बायो-डायवर्सिटी पार्क, शहर का पहला जीन बैंक होगा।

इस बायो-डायवर्सिटी पार्क में बनने वाले ‘जीन बैंक’ के लिए एलडीएविश्वविद्यालय के साथ करार किया है। इस विशेष लैब का निर्माण एवं संचालन एक निजी विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की देखरेख में किया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने एमओयू दस्तावेज पर हस्ताक्षर करके जीन बैंक के निर्माण को हरी झंडी दे दी है।

इस प्रयास से वर्तमान में विलुप्त हो रहीं दुर्लभ पौधों एवं बीजों की विभिन्न प्रजातियों को इस विशेष लैब के माध्यम से संरक्षित करने के साथ पार्क में ही रोपित किया जाएगा। भावी पीढ़ी के लिए यह परियोजना कृषि जैव विविधता के साथ खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस निर्माण से मानव जीवन के लिए अनमोल इन औषधीय पौधों के संरक्षण को सहयोग मिलेगा। एलडीए उपाध्यक्ष के अनुसार प्रथम चरण में 25 एकड़ क्षेत्रफल में 14 करोड़ रुपये की लागत से पार्क विकसित किया जा रहा है।

इस अवसर पर एलडीए सचिव विवेक श्रीवास्तव, मुख्य अभियंता मानवेन्द्र सिंह, विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ अनिल वशिष्ठ, प्रोफेसर डॉ शालिनी सिंह विसेन, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ कोमल पाण्डेय एवं डॉ बृजेश खाण्डेलवाल सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमारमीडिया को जानकारी दी कि प्राधिकरण द्वारा लीज पर दी गयी ग्रीन बेल्ट की 75 एकड़ जमीन वापस ली है। निर्माण के प्रथम चरण में 25 एकड़ क्षेत्रफल में 14 करोड़ रुपये की लागत से बायो-डायवर्सिटी पार्क विकसित किया जा रहा है।

आगे उन्होंने यह भी बताया कि पार्क में निर्माण का काम तेजी से काम चल रहा है और सिविल कार्य लगभग पूर्ण होने वाला है। उन्होंने बताया कि पार्क में लगभग 02 एकड़ क्षेत्रफल में ‘जीन बैंक’ का निर्माण किया जाएगा और इसके लिए एमिटी विश्वविद्यालय के साथ एमओयू साइन किया गया है।

इस जीन बैंक में माध्यम से विद्यार्थियों को जैव विविधता के बारे में प्रशिक्षित किया जा सकेगा। साथ ही विश्वविद्यालय के सहयोग से लैब में फील्ड बायोलॉजिस्ट व अन्य विशेषज्ञों की तैनाती भी की जाएगी।

यह पार्क ईको-टूरिज्म के साथ ही शैक्षिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण साबित होगा। यहाँ घूमने आने वाले छात्र-छात्राओं को पौधों, पक्षियों, जीव-जंतुओं एवं कीट-पतंगों आदि की जानकारी देते हुए जैव विविधता की जानकारी दी जाएगी।

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