लैंड स्लाइडिंग से वायनाड में भारी तबाही

दक्षिणी राज्य केरल में बारिश और बाढ़ के बाद भूस्खलन से बड़े पैमाने पर तबाही हुई है। इस प्राकृतिक आपदा से अबतक 63 लोगों की मौत की खबर है, जबकि 116 लोगों के घायल होने के समाचार मिले हैं।

लैंड स्लाइडिंग से वायनाड में भारी तबाही

इस भूस्खलन में सैकड़ों लोगों के फंसे होने की आशंका है। स्थानीय आपदा मोचन बल के जवान राहत और बचाव कार्य चला रहे हैं। तेज़ बारिश के बीच बचाव कार्यों में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केरल में लगातार हो रही बारिश और बाढ़ के कारण पहाड़ से मिट्टी का एक बड़ा भाग कटकर गांवों पर गिर गया। इस भूस्खलन से यहाँ बड़े पैमाने पर तबाही हुई है।


जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की साल 2021 की रिपोर्ट के अनुसार केरल के पूरे क्षेत्रफल का 43 प्रतिशत हिस्सा भूस्खलन संभावित क्षेत्र है।


केरल के मुख्यमंत्री पिनारई विजयन से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बात की और वायनाड में स्थिति का जायजा लिया। गृह मंत्री ने केंद्र सरकार की ओर से हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।

एनडीआरएफ की टीम बचाव कार्यों में लगी है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर लाया जा रहा है। उन्हें अस्थायी आश्रय शिविरों में पहुँचाया गया है। फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए हवाई मार्ग से मदद ली जा रही है।

इस लैंडस्लाइड में दर्जनों घर मिट्टी धंसने से दब गये। मलबे में अभी भी लोगों के दबे होने की आशंका है। इसके अलावा वाहन और पशु भी दब गए। वहीँ चालियार नदी में बाढ़ के कारण कई वाहनों और लोगों के बहने के भी समाचार मिले हैं।


केरल सरकार की 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक़, समुद्री तट और पश्चिमी घाट की ढलानों के समीप होने के कारण यह राज्य प्राकृतिक आपदाओं के मामले में बेहद संवेदनशील है।


प्राकृतिक सुंदरता वाला केरल अपने इको-सिस्टम के कारण बड़ा ही संवेदनशील इलाक़ा है। यह इलाक़ा अकसर प्राकृतिक आपदा का शिकार बनता है। केरल सरकार द्वारा 2019 में जारी रिपोर्ट से पता चलता है कि समुद्री तट और पश्चिमी घाट की ढलानों के समीप होने के कारण यह राज्य प्राकृतिक आपदाओं के मामले में बेहद संवेदनशील है।

जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की साल 2021 की रिपोर्ट के अनुसार केरल के पूरे क्षेत्रफल का 43 प्रतिशत हिस्सा भूस्खलन संभावित क्षेत्र है। यहाँ इडुकी की 74 प्रतिशत जबकि वायनाड की 51 प्रतिशत जमीन पहाड़ी ढलान वाली है। ऐसे में इन क्षेत्रों में भूस्खलन की आशंका बहुत ज्यादा हो जाती है।

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