विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा पिछले सप्ताह जारी रिपोर्ट बताती है कि 2023 व 2024 के दौरान, टीबी के कारण बीमार पड़ने वाले लोगों की वैश्विक दर में क़रीब 2 प्रतिशत और मृत्यु मामलों में 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

सबसे घातक संक्रामक बीमारियों में से एक तपेदिक यानी टीबी से पिछले वर्ष एक करोड़ से ज़्यादा लोग बीमार हो गए, जबकि 12 लाख से अधिक लोगों की मौत हो गई। एक अनुमान के अनुसार, विश्व की क़रीब 25 प्रतिशत आबादी टीबी बैक्टीरिया से संक्रमित है, लेकिन कुल संख्या में से केवल 5-10 प्रतिशत में ही इसके लक्षण नज़र आते हैं और फिर वे बीमार पड़ते हैं।
इस रोग के विरुद्ध वैश्विक लड़ाई में प्रगति तो हासिल हुई है और 2020 में कोविड महामारी के बाद यह पहली बार है जब टीबी मामलों में कमी आई है, मगर इसका समय पर पता लगाने व उपचार के लिए धनराशि का अभाव एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
यूएन एजेंसी के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने ध्यान दिलाया कि इस बीमारी से अब भी हर साल 10 लाख से अधिक मौतें होती हैं, जबकि उन्हें रोका जा सकता है और मरीज़ों का इलाज भी सम्भव है। पोषण के अभाव, एचआईवी संक्रमण, डायबिटीज़, धूम्रपान और ऐल्कॉहॉल के इस्तेमाल समेत अन्य कारणों से अक्सर यह बीमारी विकसित होने का जोखिम बढ़ सकता है।
टीबी मुख्यत: फेफड़ों को प्रभावित करता है। एक प्रकार के बैक्टीरिया की वजह से होने वाली यह बीमारी, संक्रमित लोगों के खाँसने, छींकने या थूकने पर हवा के ज़रिये फैलती है।
इसे प्रति वर्ष प्रति एक लाख आबादी में बीमार पड़ने वाले लोगों की संख्या के ज़रिए आंका जाता है। अध्ययन दर्शाता है कि 2020 में कोविड महामारी के बाद यह पहली बार है जब टीबी मामलों में कमी आई है। 2015 से 2024 के दौरान, यूएन स्वास्थ्य संगठन के अफ़्रीकी क्षेत्र में टीबी संक्रमण की दर में 28 प्रतिशत की कमी आई।
मृत्यु मामलों में 46 प्रतिशत की गिरावट आई है। योरोपीय क्षेत्र में टीबी मामलो की दर 39 प्रतिशत घटी है, जबकि मौतों में 49 फ़ीसदी की कमी दर्ज की गई है।
इस अवधि में, 100 से अधिक देशों के लिए टीबी संक्रमण मामलों की दर को कम से कम 20 फ़ीसदी घटाना सम्भव हुआ है।
वर्ष 2000 के बाद से अब तक, समय पर उपचार मुहैया कराने से आठ करोड़ से अधिक लोगों की जान बचाने में मदद मिली है।
2024 में टीबी के निदान के लिए रैपिड परीक्षण की कवरेज 48 प्रतिशत (2023) से बढ़कर 54 प्रतिशत (2024) पहुँच गई।
दवाओं के ज़रिए जिन टीबी संक्रमण मामलों का उपचार किया जा सकता है, उनमें 88 प्रतिशत तक की सफलता दर्ज की गई। जबकि दवा प्रतिरोधी टीबी की चपेट में आने वाले लोगों की संख्या में गिरावट दर्ज की जा रही है। साथ ही, सफल उपचार मामलों की दर भी बढ़ रही है।
2027 के लिए वार्षिक 22 अरब डॉलर जुटाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन 2024 में केवल 5.9 अरब डॉलर जुटाने में ही सफलता मिली। अन्तरराष्ट्रीय दानदाताओं से मिलने वाली मदद में कटौती होने से स्थिति और गम्भीर हुई है।
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा है कि टीबी के विरुद्ध लड़ाई में दुनिया एक अहम मोड़ पर पहुँच चुकी है। निदान के लिए 63 परीक्षण विकसित किए जा रहे हैं, 28 दवाओं का ट्रायल हो रहा है, और 18 वैक्सीन का भी परीक्षण किया जा रहा है।
इस पृष्ठभूमि में, टीबी पर वैश्विक शोध के लिए आवश्यक रक़म, राजनैतिक संकल्प, घरेलू निवेश को सुनिश्चित किए जाने पर बल दिया गया है।















