अपने बच्चों के स्मार्टफोन इस्तेमाल पर केट मिडलटन ने लगाईं पाबंदी

ब्रिटिश राजकुमारी केट मिडलटन ने अपने बच्चों के स्मार्टफोन इस्तेमाल पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। दरअसल केट मिडलटन नहीं चाहतीं कि उनके बच्चे सोशल मीडिया पर मौजूद ऐसी सामग्री देखने जो उनके लिए मुनासिब नहीं।

अपने बच्चों के स्मार्टफोन इस्तेमाल पर केट मिडलटन ने लगाईं पाबंदी

अंतर्राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, केट मिडलटन द्वारा अपने तीनों बच्चों, प्रिंस जॉर्ज, प्रिंसेस चार्लोट और प्रिंस लुइस के स्मार्टफोन इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने का कारण उन्हें सोशल मीडिया से दूर रखना या उनका स्क्रीन टाइम कम करना नहीं है, बल्कि शाही जोड़े की शादी के शुरुआती सालों से जुड़ी विचलित करने वाली सामग्री से बचना है।

रिपोर्ट में 2012 की उस घटना का ज़िक्र है जब किसी ने फ्रांस की एक निजी यात्रा के दौरान शाही जोड़े की चुपके से तस्वीरें खींच ली थीं और उन तस्वीरों ने वैश्विक विवाद खड़ा कर दिया था।

केट मिडलटन के इस नियम पर उनका कहना है कि उनके किसी भी बच्चे के पास फोन नहीं है, जिससे उनके इस विश्वास पर ज़ोर पड़ता है कि स्क्रीन टाइम “डिसकनेक्शन की महामारी” (pidemic of disconnection) को जन्म दे सकता है और बच्चे के विकास और सार्थक रिश्ते बनाने की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस तस्वीर विवाद को लेकर निजता के उल्लंघन के लिए ज़िम्मेदार फ्रांसीसी प्रकाशक के ख़िलाफ़ एक बड़ा अदालती मामला भी दायर किया गया था और प्रकाशक पर भारी जुर्माना लगाया गया था। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि केट मिडलटन जानती हैं कि तस्वीरें अभी भी सोशल मीडिया पर हैं और वह नहीं चाहतीं कि उनके बच्चे उन्हें देखें।

इस पाबंदी के हवाले से केट का मानना है कि स्मार्टफोन की दूरी परिवार के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने में मददगार होता है। इसकी वकालत में वह कहती हैं कि तकनीक के कारण परिवार शारीरिक रूप से एक साथ तो रह होते हैं, लेकिन मानसिक रूप से अनुपस्थित रहते हैं। केट का ये प्रतिबंध इस चिंता से भी प्रेरित हैं कि अत्यधिक स्क्रीन समय बच्चों के सामाजिक और भावनात्मक विकास में बाधा डाल सकता है।

गौरतलब है कि केट मिडलटन डिजिटल युग में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के महत्व पर लंबे समय से मुखर रही हैं। उन्होंने हाल ही में रॉयल फाउंडेशन के सेंटर फॉर अर्ली चाइल्डहुड को एक लेख प्रस्तुत किया है, जिसमें बच्चों के दिमाग पर अत्यधिक स्क्रीन समय और ऑनलाइन सामग्री के हानिकारक प्रभावों पर प्रकाश डाला गया है।

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