कैश की कमी के चलते छोटे शहरों में एटीएम खतरे में है

छोटे शहरो में बड़ी संख्या में एटीएम के बंद होने का खतरा पैदा हो गया है। कन्फेडरेशन ऑफ एटीएम इंडस्ट्री (CATMi) ने आरबीआई के समक्ष यह चिंता जताई है। ऑपरेटर्स का कहना है कि बढ़ती लागत और घटते इस्तेमाल से दबाव और बढ़ गया है। ऑपरेटर्स पहले ही बहुत कम मार्जिन पर काम कर रहे हैं।

छोटे शहरो में बड़ी संख्या में एटीएम के बंद होने का खतरा पैदा हो गया है। हालात को देखते हुए गांवों और कस्बों में बड़ी संख्या में एटीएम के बंद होने का खतरा है। एटीएम ऑपरेटर्स का कहना है कि वे पहले से ही कम मार्जिन पर काम कर रहे थे और अब बढ़ती लागत और घटते इस्तेमाल से दबाव और बढ़ गया है।

वर्तमान हालात का जायज़ा लें तो पाते हैं कि न्यूनतम मजदूरी में 60% तक का इज़ाफ़ा और फ्यूल की ऊंची कीमतों के कारण ऑपरेटिंग खर्च बढ़ गए हैं। दूसरी ओर एटीएम से महीने भर में होने वाली निकासी में कमी आई है।

निकासी पर नज़र डालें तो रिपोर्ट्स के मुताबिक़, जनवरी 2023 के यह आंकड़ा 570 मिलियन था जो सितंबर 2025 में घटकर 439.5 मिलियन रह गया। साल 2024-25 में देश में एटीएम की संख्या घटकर लगभग 251,000 रह गई। एक साल पहले यह 253,000 से अधिक थी। इनमे गांवों और कस्बों में भारी कमी देखने को मिली है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक एसबीआई टियर-1 शहरों के एटीएम में जरूरत से ज्यादा कैश भेज रहा है। इससे टियर-2 और टियर-3 शहरों में कैश की भारी कमी हो रही है और बड़े पैमाने पर ATM बंद होने का खतरा पैदा हो गया है। उसने साथ ही बैंकिंग इंडस्ट्री से ₹100 करोड़ के मुआवजे की भी मांग की है।

ईटी की एक रिपोर्ट से पता चला है कि आरबीआई और एसबीआई के साथ 5 जून को हुई बैठक में एटीएम ऑपरेटर्स ने कहा कि यह समस्या मुख्य रूप से एसबीआई के साथ है। इस बैंक पास देश का सबसे बड़ा एटीएम नेटवर्क है। पूरे देश में इस बैंक के लगभग 65,000 एटीएम हैं। बैंक अपने नेटवर्क के लगभग आधे हिस्से के लिए खुद ही कैश हैंडल करता है। इसमें ज्यादातर मेट्रो शहर शामिल हैं। लेकिन छोटे शहरों और कस्बों की मशीनों में कैश की कमी हो गई है। इससे वहां ग्राहकों को परेशानी हो रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स में यह खबर भी सामने आई है कि एसबीआई की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ज्यादातर कैश मेट्रो शहरों पर भेजा जा रहा है। इससे बाकी इलाकों में कैश की किल्लत हो रही है। ऐसे में इंडस्ट्री का दावा है कि उसे 100 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ है। मशीनें ऑफलाइन रहने पर ऑपरेटर्स को ट्रांजैक्शन और इंटरचेंज फीस से होने वाली कमाई का नुकसान होता है।

बैंकिंग इंडस्ट्री से कन्फेडरेशन ऑफ एटीएम इंडस्ट्री ने इस नुकसान की भरपाई की मांग की है। उसका कहना है कि अगर एसबीआई ने 20 जून तक इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकाला तो कई एटीएम बंद हो सकते हैं।

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