जयपुर साहित्य महोत्सव में विकलांगजन के संघर्षों और चुनौतियों पर चर्चा हुई

देश में साहित्य के वार्षिक आयोजनों में इन दिनों जयपुर साहित्य महोत्सव कुछ खास रहा। इसका एक सत्र विकलांगजन को समाज में अपना पूर्ण स्थान पाने के लिए तमाम चुनौतियों से निपटने के उपायों की चर्चा पर आधारित था।

जयपुर साहित्य महोत्सव में विकलांगजन के संघर्षों और चुनौतियों पर चर्चा हुई।

फरवरी के पहले सप्ताह तक चले जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के आयोजन में संयुक्त राष्ट्र ने इस वर्ष कुछ ऐसे ही मुद्दों के जवाब तलाश करने के प्रयास किए। ये प्रश्न फेस्टिवल में, संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित एक ज्ञानवर्धक सत्र में प्रमुख चर्चा का विषय रहे।

आयोजन के दौरान इस सत्र का विषय था बाधाओं को पाटना: समावेशिता, पहुंच और सशक्तिकरण (Bridging Barriers: Inclusivity, Accessibility and Empowerment)।


आयोजन में मौजूद पैनल के सदस्यों ने विकलांग व्यक्तियों की आपबीतियाँ सुनने, देखने, जीवन जीने और असफलताओं व बाधाओं पर क़ाबू पाने के महत्व पर प्रकाश डाला।


ब्रिंग आईटी ऑन (Bring It On) शीर्षक से पुस्तक लिखने वाली, पैराम्पियन दीपा मलिक ने सत्र में अपने संघर्ष की कहानी बयान की। उन्हें रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर के इलाज के दौरान कई बार सर्जरी करानी पड़ी, जिससे उन्हें कमर से नीचे तक लकवा मार गया था। लेकिन फिर भी दीपा मलिक ने हार नहीं मानी और अपनी प्रतिभा एवं ऊर्जा को दिशा देने के लिए एथलैटिक्स, तैराक़ी और मोटरसाइकिलिंग का रुख़ किया।

दीपा ने बताया- “मैं सर्जरी और उसकी जटिलताओं से जीवित बच गई और तब मैंने इस नए शरीर को समझना शुरू किया, ताकि मैं ज़िन्दगी का जश्न मना सकूँ।”

आगे वह कहती हैं कि खिलाड़ी बनना दरअसल, इन बाधाओं को तोड़ने और उस मानसिकता को बदलने का उनका एक तरीक़ा जिसके ज़रिए अपने जीवन की इस चुनौती को स्वीकार करने के साथ संघर्ष को चुना।

संयुक्त राष्ट्र के रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर शॉम्बी शार्प इस आयओजन के बारे में कहते हैं कि विकलांगता समावेशन न केवल मानवाधिकारों की कहानी है, बल्कि एक आर्थिक कहानी भी है।

उनके मुताबिक़, चाहे आप एक राष्ट्र हों, एक कम्पनी हों, एक समुदाय या एक परिवार हों, आँकड़े बहुत स्पष्टता से दर्शाते हैं कि आप जितना अधिक समावेशी होंगे, उतने ही अधिक सफल होंगे।

शॉम्बी का मानना है कि हमें ऐसे व्यावहारिक क़दमों को प्राथमिकता देनी चाहिए जो पहुँच हासिल करने के रास्ते की बाधाओं को दूर करें और विकास के एजेंडे में विकलांगजन की आवाज़ एवं अनुभवों को शामिल करते हुए समावेशन को बढ़ावा दें।

इस चर्चा में जिन वक्ताओं ने भाग लिया, उनमे प्रमुख थे डीआर मेहता जो ‘जयपुर फ़ुट’ नामक संस्था के संस्थापक हैं। इस संस्था द्वारा बनाए जाने वाले कृत्रिम अंगों का उपयोग दुनिया भर में लाखों लोग करते हैं।

इसके अलावा, पदक विजेता पैरालिम्पियन दीपा मलिक, फ़ोटोग्राफ़र और पूर्व स्ट्रीट किड विक्की रॉय एवं संयुक्त राष्ट्र के रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर शॉम्बी शार्प भी चर्चा में शामिल हुए।

इस अवसर पर फ़ोटोग्राफ़र विक्की रॉय ने एक फ़ोटो प्रदर्शनी भी प्रस्तुत की, जिसका विषय था- ‘Everyone is Good at Something’, यानि हर कोई किसी न किसी काम में माहिर होता है।

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