जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया, दो महीने के भीतर ही करना होगा उपराष्ट्रपति का चयन

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे का कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बताते हुए उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को अपना इस्तीफा भेजा

जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया, दो महीने के भीतर ही करना होगा उपराष्ट्रपति का चयन

जगदीप धनखड़ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस्तीफा पत्र पोस्ट करते हुए बताया- “आदरणीय राष्ट्रपति जी, स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिकता देने और चिकित्सीय सलाह का पालन करने के लिए मैं संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के अनुसार तत्काल प्रभाव से भारत के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देता हूं। मैं भारत की राष्ट्रपति के प्रति उनके अटूट समर्थन और मेरे कार्यकाल के दौरान हमारे बीच बने सुखद एवं अद्भुत कार्य संबंधों के लिए अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूं।”

भारत में उपराष्ट्रपति देश का दूसरा सबसे ऊंचा संवैधानिक पद होता है। गौरतलब है कि संविधान के अनुच्छेद 68 के खंड 2 के मुताबिक़, उपराष्ट्रपति के त्यागपत्र, निधन या पद से हटाए जाने अथवा अन्य किसी कारण से खाली होने वाली जगह को भरने के लिए जल्द से जल्द चुनाव कराने का प्रावधान है।

हलांकि कांग्रेस नेता जयराम रमेश का कहना है कि धनखड़ ने इस्तीफ़े की वजह अपनी सेहत बताई है, जिसका मान रखना चाहिए, लेकिन सच्चाई ये भी है कि उनके इस्तीफ़े के पीछे और गहरे कारण हैं। उन्होंने पोस्ट किया- “जगदीप धनखड़ का इस्तीफ़ा उनके बारे में बहुत कुछ कहता है। साथ ही, यह उन लोगों की नीयत पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है, जिन्होंने उन्हें उपराष्ट्रपति पद तक पहुंचाया था।”

उपराष्ट्रपति की मृत्यु, इस्तीफ़े या पद से हटाए जाने या दूसरे कारण से खाली होने पर इस पद को भरने के लिए जल्द से जल्द चुनाव कराने की व्यवस्था की जाती है। चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक़, सामान्य परिस्थितियों में अगले उपराष्ट्रपति का चुनाव निवर्तमान उपराष्ट्रपति के कार्यकाल की समाप्ति के 60 दिनों के भीतर करना होता है।

संविधान के अनुच्छेद 66 केअनुसार, लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों से मिलकर बना निर्वाचक मंडल यानी इलेक्टोरल कॉलेज उप राष्ट्रपति चुनता है। अनुपातिक प्रतिनिधित्व के मुताबिक़, इलेक्शन सिंगल ट्रांसफरेबल वोट के माध्यम से होता है। ये वोटिंग सीक्रेट बैलेट द्वारा की जाती है।

अपनी पोस्ट में प्रधानमंत्री और सम्मानित मंत्रिपरिषद के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री के सहयोग और समर्थन अमूल्य बताया। साथ ही यह भी कहा कि उनका कार्यकाल बहुत कुछ सिखाने वाला रहा है। आगे उन्होंने कहा कि संसद के सभी सदस्यों से उन्हे गर्मजोशी, विश्वास और स्नेह मिला है, वह हमेशा उनकी स्मृति में रहेगा। उन्होंने इस महान लोकतंत्र में उपराष्ट्रपति के रूप में प्राप्त अमूल्य अनुभवों और अंतर्दृष्टि के लिए तहे दिल से आभार व्यक्त किया है।

18 मई 1951 को राजस्थान के झुंझुनू ज़िले के किठाना गाँव में जन्मे जगदीप धनखड़ ने गाँव के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में कक्षा 1‑5 की पढ़ाई की। उन्होंने घरधाना सरकारी मिडिल स्कूल में दाख़िला लिया और साल 1962 में स्कॉलरशिप पर चित्तौड़गढ़ सैनिक स्कूल गए।

जयपुर के महाराजा कॉलेज से बीएससी (फिज़िक्स ऑनर्स) की डिग्री हासिल करने के बाद राजस्थान विश्वविद्यालय से एलएलबी (1978‑79) की पढ़ाई पूरी की। धनखड़ ने नवंबर 1979 से राजस्थान बार काउंसिल के सदस्य के रूप में वकालत शुरू की।

मार्च 1990 में उन्हें राजस्थान हाई कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया औ 1990 से ही वह सुप्रीम कोर्ट में भी वकालत करते रहे। उनका राजनीतिक करियर 1989 में जनता दल के टिकट से झुंझुनू लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर शुरू हुआ।

धनखड़ 1990‑91 के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री (संसदीय कार्य मंत्रालय) रहे और जनता दल विभाजन के बाद 1991 में कांग्रेस में शामिल हुए। अजमेर से कांग्रेस टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा मगर हार गए।1993‑98 के बीच वे किशनगढ़ विधानसभा सीट से विधायक रहे। इसके बाद साल 2003 में धनखड़ भाजपा में शामिल हो गए और

लोकसभा और विधानसभा के अपने कार्यकाल में वे कई प्रमुख संसदीय समितियों के सदस्य रहे। 74 वर्षीय धनखड़ ने अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति का पदभार संभाला था। उनका कार्यकाल 2027 तक था। भारत में उप राष्ट्रपति का पद राष्ट्रपति के पद के बाद सर्वोच्च संवैधानिक पद होता है। संविधान के मुताबिक़ उपराष्ट्रपति का चुनाव संविधान के अनुच्छेद 63 से 71 और उप राष्ट्रपति (चुनाव) नियमावली 1974 के तहत होता है। राष्ट्रपति का पद खाली होने की दशा में चुनाव आयोग को नए उप राष्ट्रपति के चुनाव की व्यवस्था करनी होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *