जंतर-मंतर पर पर्यावरणविद सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन अनशन बारहवें दिन भी जारी है। उनका कहना है कि शिक्षा और पर्यावरण दोनों ऐसे विषय हैं जिनका सीधा संबंध देश के भविष्य से है और इन्हें राजनीतिक नजरिए से नहीं बल्कि राष्ट्रीय हित के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
राजधानी दिल्ली में एक तरफ बारिश का ज़ोर है वहीँ इस बीच जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का धरना 20वें दिन भी जारी है। बेहद ख़राब मौसम और ज़ोरदार बारिश के बीच धरना स्थल पर मौजूद हैं।
जंतर-मंतर पर डटे यह प्रदर्शनकारी बरसाती और तिरपाल के सहारे जमा होकर अपनी मांगों के लिए सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। इस लोगों की मांग है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया जाए और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर ठोस कार्रवाई की जाए।
आंदोलन के समर्थन में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन अनशन 12वें दिन में पहुंच चुका है। भूख हड़ताल पर बैठे छात्र हरिकेश की तबीयत खराब होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बीते दिन पर्यावरणविद सोनम वांगचुक ने इस आंदोलन में शामिल होने का आह्वान करते हुए सोशल मीडिया पर अपनी बात कही।
दिल्ली और एनसीआर में सुबह से ही रुक-रुक कर बारिश हो रही है। इस बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव और यातायात की समस्या बनी हुई है। मगर प्रदर्शनकारी धरना स्थल पर मौजूद हैं। यह प्रदर्शनकारी खराब मौसम में भी डटे हैं और इनका कहना है कि मौसम चाहे जैसा भी हो, संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार इसकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, इस प्रदर्शन को सपोर्ट दे रहे सोनम वांगचुक ने अपने हितैषियों के संदेशों के जवाब में कहा है कि वह अंदर से पूरी तरह मजबूत महसूस कर रहे हैं और फिलहाल स्थिति स्थिर है।बताते चलें कि सोनम वांगचुक को देशभर से समर्थन के साथ अनशन खत्म करने की अपील भी की जा रही है। उनके स्वास्थ्य के लिए कई लोग संदेश भेज रहे हैं कि अब अनशन खत्म कर दें और अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। जवाब में उन्होंने कहा कि यदि आज अनशन खत्म भी कर दें, तो इससे उन छात्रों को न्याय नहीं मिलेगा जिन्होंने कथित तौर पर आत्महत्या की, न ही भविष्य में ऐसी घटनाएं रुकेंगी।
पर्यावरणविद वांगचुक का कहना है कि यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि देश के लाखों छात्रों, शिक्षा व्यवस्था और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का सवाल है। इस बीच सोनम वांगचुक ने शिक्षा व्यवस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि यदि देश में नीतियों को लेकर समय रहते गंभीर निर्णय नहीं लिए गए तो लद्दाख के पहाड़, हिमालय और भारत की नदियों को बचाना मुश्किल हो जाएगा।
रिपोर्ट्स के अनुसार, वांगचुक ने अपने समर्थकों से 20 जुलाई को दिल्ली पहुंचने का आह्वान किया। उनका कहना है कि इसी दिन संसद का मानसून सत्र शुरू होगा और जंतर-मंतर से संसद तक एक शांतिपूर्ण मार्च निकालने की योजना हैं। समर्थकों से इस मार्च में शामिल होने की अपील करते हुए उनका कहना है कि बड़ी जनभागीदारी से सरकार और संसद तक जनता की आवाज मजबूती से पहुंचेगी।