इसरो का एलवीएम-3 एम-6 मिशन श्रीहरिकोटा से सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ

इसरो का एलवीएम-3 एम-6 मिशन सतीश धवन स्पेस सेंटर से आज सुबह लॉन्च हुआ। यह मिशन अमरीका-बेस्ड एएसटी स्पेस मोबाइल के साथ एक कमर्शियल डील के तहत ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 सैटेलाइट को ऑर्बिट में ले गया। यह मिशन भारत के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।

इसरो का एलवीएम-3 एम-6 मिशन श्रीहरिकोटा से सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के भारी लिफ्ट प्रक्षेपण यान एलवीएम3-एम6 की उड़ान सुबह 8.54 बजे सफलतापूर्वक लॉन्च। इस अवसर पर यहाँ मौजूद छात्रों में जबरदस्त उत्साह देखा गया।

इस सफल लॉन्च पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘भारत ने अंतरिक्ष में एक बड़ी छलांग लगाई है। LVM3-M6 मिशन की सफलता के साथ, भारत ने अपने धरती से अब तक का सबसे भारी सैटेलाइट लॉन्च किया है। यह सैटेलाइट अमेरिका का BlueBird Block-2 है, जिसे उसकी सही कक्षा में स्थापित किया गया है। यह भारत के लिए एक गर्व का पल है।’

यह मिशन अगली पीढ़ी के कम्युनिकेशन सैटेलाइट को ऑर्बिट में तैनात करेगा, जिसे दुनिया भर के स्मार्टफोन को सीधे हाई-स्पीड सेलुलर ब्रॉडबैंड देने के लिए डिजाइन किया गया है। गौरतलब है कि बड़ी संख्या में छात्र इसरो के इस मिशन की लॉन्चिंग का गवाह बनने के लिए यहाँ पहुंचे थे।

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के मुताबिक़, 43.5 मीटर ऊंचा एमवीएम3 तीन चरणों वाला रॉकेट है। इसमें क्रायोजेनिक इंजन लगा है। इसे इसरो के ‘लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर’ ने विकसित किया है। लॉन्चिंग के लिए आवश्यक अत्यधिक थ्रस्ट प्रदान करने के लिए इस प्रक्षेपण यान में दो एस200 ठोस रॉकेट बूस्टर लगाए गए हैं, जिन्हें विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र ने डेवलप किया है।

एजेंसी द्वारा साझा जानकारी में बताया गया है कि प्रक्षेपण के लगभग 15 मिनट बाद ‘ब्लूबर्ड ब्लॉक-2’ उपग्रह के रॉकेट से अलग होने की उम्मीद है। ये 600 किलोमीटर की ऊंचाई पर तैनात होगा। ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 मिशन का उद्देश्य उपग्रह के जरिए सीधे मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। यह नेटवर्क दुनिया में कहीं भी, कभी भी, सभी के लिए 4जी और 5जी वॉयस-वीडियो कॉल, संदेश, स्ट्रीमिंग और डेटा सेवाएं उपलब्ध कराएगा।

ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 स्पेसक्राफ्ट एलवीएम-3 रॉकेट के इतिहास में लो अर्थ ऑर्बिट में लॉन्च किया जाने वाला सबसे भारी पेलोड है, जिसका वजन 6.5 टन है। लो अर्थ ऑर्बिट (एलईओ) सैटेलाइट 19 अक्टूबर को अमेरिका से भारत आया।

इसरो और अमरीका के बीच यह दूसरा कोलेबोरेशन है। जुलाई में, इसरो ने 1.5 बिलियन डॉलर का नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार मिशन (निसार) सफलतापूर्वक लॉन्च किया था, जिसका मकसद कोहरे, घने बादलों और बर्फ की परतों को भेदने की कैपेसिटी के साथ हाई-रिजॉल्यूशन अर्थ स्कैन लेना है।

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