अमरीका और भारत के साझा मिशन NISAR यानी NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar सैटेलाइट ने हाल ही में अपने रडार डेटा को पब्लिक के लिए जारी किया है। इसके माध्यम से सामने आने वाली तस्वीरों ने वैज्ञानिकों को लेकर आम लोगों तक सभी का ध्यान खींचा है।
नासा-इसरो के सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR)- NISAR- मिशन के लॉन्च के काफ़ी समय बाद, इसरो ने S-बैंड SAR का इस्तेमाल करके ली गई तस्वीरों का पहला सेट साझा किया। कलर-कोडेड तस्वीरों में तमिलनाडु का नागपट्टिनम ज़िला, पूर्वी अंटार्कटिका, असम में ब्रह्मपुत्र नदी, यूएसए में इडाहो, ग्रीनलैंड और इंडोनेशिया शामिल थे।
अंटार्कटिका के बर्फीले इलाके की तस्वीर देखने में बिल्कुल एक हमिंगबर्ड चिड़िया जैसी नजर आती है। हालांकि यह एक संयोग है, मगर इसके पीछे की वैज्ञानिक जानकारी बेहद अहम है। यही कारण है कि वैज्ञानिकों ने इसका नाम हमिंगबर्ड रखा है।
निसार दुनिया का पहला ऐसा फ्री-फ्लाइंग स्पेस मिशन है, जिसमें दो अलग-अलग रडार सिस्टम यानी L-band और S-band, एक साथ लगे हुए हैं। दोनों सिस्टम अपनी अलग-अलग वेवलेंथ की मदद से एक-दूसरे को सहयोग करते हैं। इसमें लंबी वेवलेंथ वाला L-band पेड़ों की छतरी के आर-पार जाकर नीचे की जमीन की तस्वीर ले सकता है, जबकि S-band पत्तियों के आकार के आधार पर पेड़ों की छतरी से जुड़ी जानकारी जुटाने में सक्षम है।
इसरो के अनुसार, NISAR सैटेलाइट 747 किलोमीटर की सन-सिंक्रोनस कक्षा में काम कर रहा है और इसका उद्देश्य 12-दिन के रिपीट साइकल के साथ हर मौसम में दुनिया भर की कवरेज देना है।
असम में ब्रह्मपुत्र नदी बेसिन की तस्वीर 9 जुलाई को ली गई, जिससे उस इलाके की हाइड्रोलॉजिकल और ज़मीन की बनावट की विशेषताओं का पता चला, जिससे बाढ़ के मैदान की मैपिंग और पर्यावरण की निगरानी में मदद मिलती है।
2 जुलाई को ली गई ये तस्वीरों में वैज्ञानिकों ने देखा कि कम्पोजिट इमेज मैंग्रोव, खेती वाले खेतों, वेटलैंड्स और तटीय लैगून को उनके रडार बैकस्कैटर गुणों के आधार पर अलग-अलग पहचानने में मदद करती है। टीमों ने बताया कि इन तस्वीरों से तटीय संसाधनों के मैनेजमेंट और पर्यावरण की निगरानी के लिए जानकारी मिली।
इससे पहले 25 सितंबर, 2025 को, नासा जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL) ने L-बैंड SAR का इस्तेमाल करके ली गई तस्वीरों का पहला सेट साझा किया था। ये तस्वीरें मिशन के लॉन्च के 90 दिनों के भीतर शेयर की गई थीं, जो कि पूरे वैज्ञानिक ऑपरेशन के शुरू होने का तय समय था।
नासा-JPL और इसरो का यह जॉइंट मिशन 30 जुलाई, 2025 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से GSLV-F16 के सहयोग से लॉन्च किया गया था। जहाँ नासा को 35 टेराबाइट डेटा मिलेगा, वहीं नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर को 8-टेराबाइट डेटा मिलेगा और अंटार्कटिका सेंटर को भी डेटा मिलेगा। इसरो ने पोलराइज़ेशन के बारे में बताया, जिसमें तमिलनाडु के नागपट्टिनम में पेड़-पौधों, ज़मीन और जल निकायों को हाइलाइट किया गया।
पूर्वी अंटार्कटिका की तस्वीर 10 जुलाई को ली गई थी, जिसमें ग्लेशियर वाला इलाका, बर्फ़ की बड़ी चादरें, तैरती हुई समुद्री बर्फ़ और दक्षिणी महासागर के आस-पास का इलाका दिखाई दे रहा था।
इसरो की टीम ने पाया कि बर्फ़ की विशेषताएं गहरे खुले पानी से अलग दिख रही थीं, जिससे क्रायोस्फीयर (बर्फ़ वाले इलाकों) के अलग-अलग हिस्सों में साफ़ फ़र्क पता चल रहा था। इन तस्वीरों में केरल में रामसर साइट ‘वेम्बनाड-कोल वेटलैंड’, कर्नाटक के तुमकुरु में ‘मंगला जलाशय’, अंटार्कटिका में ‘रेनिक ग्लेशियर’, ओडिशा में ‘चिल्का कोस्टल लैगून’, गुजरात में अहमदाबाद, भावनगर और आसपास के इलाके, बिहार और गंगा नदी, ब्राज़ील में अमेज़न नदी, भारत में ‘कोसी बैराज’, गुजरात में ‘खंभात की खाड़ी’, इक्वेटोरियल गिनी में ‘बाटा शहर’ और ऑस्ट्रेलिया में ‘मिल्डुरा शहर’ भी शामिल हैं।