लड़कियों की शिक्षा में लगने वाला हर एक डॉलर, औसतन 2.80 डॉलर की वापसी देता है, जिससे अरबों डॉलर की अतिरिक्त जीडीपी उत्पन्न होती है। ठीक इसी तरह, पानी और स्वच्छता पर ख़र्च किया गया हर एक डॉलर करीब 4.30 डॉलर की स्वास्थ्य सेवाओं की बचत कराता है।

विकास के लिए वित्तपोषण पर होने वाला चौथा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (FfD4) 30 जून से 3 जुलाई 2025 तक आयोजित किया जायेगा। यह आयोजन सेविले, स्पेन में किया जा रहा है। सम्मेलन में नए और उभरते मुद्दों, सतत विकास लक्ष्यों को पूरी तरह से लागू करने की तत्काल आवश्यकता और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय ढांचे में सुधार का समर्थन करने पर चर्चा की जाएगी।
आंकड़े बताते हैं कि सही जगह पर निवेश हुआ सिर्फ़ एक डॉलर भी बड़ा बदलाव ला सकता है। कमज़ोर और ज़रूरतमन्द तबके का सहयोग दान नहीं बल्कि एक बेहतर भविष्य के लिए साझा निवेश है। इसके बावजूद आज वैश्विक विकास के लिए वित्तीय सहयोग में भारी कटौती
देखने को मिल रही है।
इन बदलते हालत के मद्देनज़र, संयुक्त राष्ट्र इस स्थिति में बदलाव लाने की दिशा में प्रयास करते हुए स्पेन के सेविया शहर में एक महत्वपूर्ण सम्मेलन आयोजित कर रहा है। इस सम्मेलन का उद्देश्य एक न्यायपूर्ण और टिकाऊ दुनिया के लिए बड़े पैमाने पर निवेश को प्रोत्साहित करना है।
मौजूदा आँक़ड़े साफ़ संकेत देते हैं कि जिन देशों के पास सबसे कम संसाधन हैं, उनकी मदद करना सभी के लिए लाभकारी है, और इससे लाभान्वित होने वालों में, अमीर देश भी शामिल हैं।
आंकड़े बताते हैं कि सही जगह पर निवेश हुआ सिर्फ़ एक डॉलर भी बड़ा बदलाव ला सकता है। उदाहरण के तौर पर, हर व्यक्ति पर सालाना सिर्फ़ 1 डॉलर ख़र्च करके, ग़ैर-संक्रामक रोगों से लड़ने के लिए संसाधन दिए जाएँ, तो 2030 तक क़रीब 70 लाख लोगों की मौतों को टाला जा सकता है। ठीक इसी तरह, आपदा जोखिम कम करने के लिए हुआ हर एक डॉलर का निवेश, बाद में पुनर्बहाली में 15 डॉलर तक की लागत बचा सकता है। इतने ठोस और तार्किक सबूतों के बावजूद विकास सहायता को लेकर अक्सर ग़लत धारणा भी है। जहाँ कुछ लोग इसे केवल दान समझते हैं, तो कुछ मुनाफ़ा कमाने का साधन।
उम्मीद है कि सेविले सम्मेलन एक राजनीतिक घोषणापत्र तैयार करेगा जिसमें विकासशील देशों के सामने आने वाली संरचनात्मक बाधाओं को दूर करने के लिए एक नई प्रतिबद्धता सामने आएगी। इस दौरान देखना होगा कि अमीर देश अपनी राजनीतिक और वित्तीय प्रतिबद्धताओं में, और नागरिक समाज और विकासशील देश सार्थक कार्यान्वयन और अनुवर्ती कार्रवाई के लिए कितनी दृढ़ता से दबाव डालते हैं।
ऐसे में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की नवीनतम रिपोर्ट, अफ़ग़ान महिलाओं की उद्यमिता (entrepreneurship) पर बनी आम धारणाओं को चुनौती देती है। यह रिपोर्ट बताती है कि ये महिलाएँ दान नहीं मांग रहीं, वे सिर्फ़ एक न्यायपूर्ण अवसर चाहती हैं, जिससे वे अपनी मेहनत से आगे बढ़ सकें।
रिपोर्ट कहती है कि अगर सहायता नेटवर्क को मज़बूत किया जाए, तो वे न केवल अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा सकती हैं बल्कि अफ़ग़ानिस्तान, इक्वाडोर या किसी भी देश में एक बेहतर भविष्य की राह बना सकती है।
बताते चलें कि विकास के लिए वित्तपोषण प्रक्रिया की शुरुआत सबसे पहले 2002 में मैक्सिको के मोंटेरे में हुई थी, उस समय जब विकासशील देश बढ़ते कर्ज के बोझ और रियायती वित्त तक सीमित पहुंच से जूझ रहे थे।
मोंटेरे में हुए उद्घाटन सम्मेलन ने मोंटेरे सर्वसम्मति को जन्म दिया , जो एक ऐतिहासिक समझौता था। इस समय अंतर्राष्ट्रीय कराधान, सहायता प्रतिबद्धताओं और ऋण राहत में तत्काल सुधारों का आह्वान किया गया। अगला सम्मलेन 2008 में दोहा में जबकि 2015 अदीस अबाबा में किया गया। बाद के एफएफडी सम्मेलनों ने इस एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश की। फिर भी आज, चुनौतियाँ बनी हुई हैं और कई मायनों में और भी बढ़ गई हैं।














