भारत के रजिस्ट्रार जनरल (आरजीआई) ने जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। यह बदलाव कई अनियमितताओं को देखते हुए किए गए हैं। जन्म प्रमाण पत्र की प्रक्रिया में बदलाव आम लोगों से आमजन को सुविधा मिल सकेगी।

अब सभी अस्पतालों, ख़ासकर सरकारी अस्पतालों को ये सुनिश्चित करना होगा कि बच्चे की पैदाइश के बाद मां को अस्पताल से छुट्टी देने से पहले ही जन्म प्रमाण पत्र दे दिया जाए। यह आदेश 12 जून 2025 को जारी एक आधिकारिक नोटिस में दिया गया है। बताते चलें कि भारत में जन्म प्रमाण पत्र, जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रेशन (आरबीडी) अधिनियम 1969 की धारा 12 के तहत जारी किया जाता है। इस अधिनियम को 2023 में संशोधित किया गया था।
बताते चलें कि डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र सरकारी नौकरी से लेकर शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश, विवाह आदि के पंजीकरण में जन्म तिथि साबित करने का एकमात्र दस्तावेज है। यह नियम पहली अक्टूबर 2023 में अधिनियम संशोधन के साथ लागू किया गया था।
भारत के रजिस्ट्रार जनरल ने इस मौजूदा प्रक्रिया में बदलाव करते हुए निर्देश दिया है कि बच्चे के जन्म के बाद, जैसे ही उसका पंजीकरण पूरा हो जाए, रजिस्ट्रार को सात दिनों के भीतर इलेक्ट्रॉनिक या दूसरे माध्यम के ज़रिए धारा 8 और 9 के तहत जन्म प्रमाण पत्र जारी करना होगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि बच्चे की मां को अस्पताल से छुट्टी मिलने से पहले ही प्रमाण पत्र सौंप दिया जाए।
भारत के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि रजिस्ट्रार को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए कि वे अस्पताल में बच्चे का जन्म होते ही उसका पंजीकरण करें और तुरंत जन्म प्रमाण पत्र जारी करें, जिससे मां को अस्पताल से छुट्टी से पहले नवजात का जन्म प्रमाण पत्र मिल सके।
नोटिस में आगे दी गई जानकारी के मुताबिक़, 1969 के जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम में संशोधन, राज्य नियमों में बदलाव और एक नया केंद्रीय सीआरएस पोर्टल बनाना शामिल है। आरजीआई द्वारा जन्म प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ को अस्पताल से मां को छुट्टी मिलने से पहले ही सौंपे जाने की व्यवस्था की गई है। खासकर उन सरकारी अस्पतालों में जहां देश के 50% से अधिक संस्थागत जन्म होते हैं।
