इस्लामी क्रांति के महान सैनिक, आयतुल्लाह हाएरी शीराज़ी का क़ुम में इंतेक़ाल

इन्ना लिल्लाहे वा इन्ना इलेह ए राजेऊन :- यह बताते हुवे आज मैं बहुत रंजीदा हूँ कि इस्लामी क्रांति के महान सैनिक, आयतुल्लाह हाएरी शीराज़ी का ईरान के क़ुम शहर में इंतेक़ाल हुआ, उनके अचानक इंतेक़ाल से सिर्फ़ ईरान ही नहीं वरन पूरी दुनिया में ग़म का माहौल है.

आयतुल्लाह हाएरी कुछ वक़्त से बीमारी के कारण क़ुम के हज़रत अली इब्ने अबी तालिब अस्पताल में भर्ती थे जहाँ आज दोपहर में आपका देहांत हो गया जिससे पूरे ईरान और इस्लामी दुनिया में शोक की लहर दौड़ गई।

आप की तद्फीन आज यानि गुरुवार को सुबह 9:00 बजे क़ुम शहर में मस्जिदे इमाम हसन अस्करी अलैहिस्सलाम से हजरत मासूमा स.अ के रोज़े की ओर किया जाएगा।

आयतुल्लाह मोहम्मद सादिक़ मोह्युद्दीन हाएरी शीराज़ी ने सन 1315 शम्सी में शीराज़ में पैदा हुवे । ईरान के इंक़ेलाब में आपका बड़ा महतव्पूर्ण योगदान रहा है अपने राजनीतिक कार्यों के कारण आपको कई बार जेल के ज़ुल्म ओ सितम और जिला वतनी भी सहनी पड़ी। इंक़ेलाब के बाद आपने शिक्षण कार्यों में जीवन व्यतीत किया और कुछ दिनों के बाद असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स फॉर लीडरशिप के सदस्य बन गए आयतुल्लाह मोह्युद्दीन शीराज़ी ने आयतुल्लाह ब्रूजर्दी, आयतुल्लाह अराकी और इमाम खुमैनी जैसे दिग्गज विद्वानों से शिक्षा प्राप्त की थी।


प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार आयतुल्लाह हाएरी शीराज़ी ने जो ईरान के शीराज़ शहर के इमामे जुमा थे और असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स फॉर लीडरशिप के सदस्य भी थे कल दोपहर में 81 साल की उम्र में इंतेक़ाल हुआ। दरस ओ तदरीस के अलावा वह इस्लामी क्रांति के महान योद्धा शुमार किये जाते है उनकी नेक काविशे रहती दुनिया तक क़ाएम रहेंगी. उनके अचानक इंतेक़ाल से मोआशरे का वह नुकसान हुआ है जिसकी कमी पुर होना मुश्किल है.
इस्लामी क्रांति के योद्धाओं में शामिल वरिष्ठ धर्मगुरु आयतुल्लाह मोहियुद्दीन हायरी शीराज़ी ने आयतुल्लाह बुरुजर्दी , आयतुल्लाह अराकी और इमाम ख़ुमैनी जैसे वरिष्ठ विद्वानों से शिक्षा प्राप्त की थी । वह इस्लामी क्रांति के संघर्ष में कई बार बंदी भी बनाये गए और सरकारी अत्याचारों का सामना किया, इस्लामी क्रांति के बाद इमाम ख़ुमैनी ने आपको शीराज़ के इमाम जुमा जैसी महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी सौंपी थी ।

आयतुल्लाह हाएरी शीराज़ी साहेब इमामे जुमा के अचानक इंतेक़ाल से मुआशरे में वह खला पैदा हो गया जिसका पुर होना मुश्किल ही नहीं ना मुमकिन भी है.अल्लाह उनकी मग़फ़िरत करें. आमीन

 

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