ग्लोबल स्तर पर नर्सों की संख्या में वृद्धि के बाद भी स्वास्थ्य देखभाल में असमानता

प्रत्येक वर्ष 12 मई को आधुनिक नर्सिंग की संस्थापक के रूप में जानी जाने वाली फ्लोरेंस नाइटिंगेल के सम्मान में उनके जन्मदिन पर अन्तर्राष्ट्रीय नर्सेज दिवस मनाया जाता है। फ्लोरेंस नाइटेंगल को ‘लेडी विथ द लैंप’ के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने अपना जीवन नर्सिंग और इंसानियत के लिए समर्पित कर दिया। बताते चलें कि पहला अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस 1974 में मनाया गया था।

ग्लोबल स्तर पर नर्सों की संख्या में वृद्धि के बाद भी स्वास्थ्य देखभाल में असमानता

दुनिया भर में स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं में नर्स की संख्या में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। पिछले पाँच वर्षों में ये बढ़ोत्तरी क़रीब 19 लाख है। इसके बावजूद विभिन्न देशों व क्षेत्रों में नर्सों की सेवाएँ समान रूप से उपलब्ध नहीं हैं।

यह नई रिपोर्ट, ‘अन्तरराष्ट्रीय नर्स दिवस’ के अवसर पर जारी की गई है, जोकि 194 सदस्य देशों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

नर्सों की उपलब्धता व सेवाओं में व्याप्त असमानताओं की वजह से दुनिया के अनेक हिस्सों में बसी आबादी को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध नहीं है, जिससे वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा पर असर होता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन और उसके साझेदार संगठनों की एक नई रिपोर्ट से भी यही निष्कर्ष निकलता है कि नर्सों की स्वयं में विसंगति बरक़रार है।

सोमवार को प्रकाशित State of the World’s Nursing 2025 रिपोर्ट के अनुसार, नर्सों की संख्या वर्ष 2018 में 2.79 करोड़ से बढ़कर 2023 में 2.98 करोड़ तक पहुँच गई है। इस रिपोर्ट को बनाने में यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के अलावा अन्तरराष्ट्रीय नर्स परिषद सहित अन्य संगठनों ने भी अपना सहयोग दिया है।

अध्ययन से पता चलता है कि वर्ष 2020 में 62 लाख नर्सों की कमी थी, जिसमें सुधार आया है और 2023 में यह खाई घटकर 58 लाख ही रह गई है। इसके 2030 तक 41 लाख रह जाने का अनुमान है।

दुनिया भर में क़रीब 78 प्रतिशत नर्सें उन देशों में हैं, जिनकी जनसंख्या विश्व आबादी की केवल 49 प्रतिशत है। इस प्रगति में विभिन्न क्षेत्रों में पाई जाने वाली विसंगति भी मौजूद है।

रिपोर्ट से पता चलता है कि निम्न- और मध्य-आय वाले देशों में नर्सों की पढ़ाई-प्रशिक्षण, उन्हें रोज़गार देना और उसे बनाए रखना बेहद चुनौतीपूर्ण है। इसके लिए इन स्थानों पर स्वास्थ्य प्रणाली में घरेलू निवेश किया जाना बेहद अहम है।

दूसरी तरफ, उच्च-आय वाले देशों में बड़ी संख्या में नर्सें सेवानिवृत हो रही हैं। ये संख्या अभी और बढ़ेगी और इसके लिए तैयार रहने की आवश्यकता है। ऐसे में विदेशों में प्रशिक्षित नर्सों पर बढ़ती निर्भरता की समीक्षा किए जाने की भी ज़रूरत है। रिपोर्ट से कई अन्य बातें भी सामने आई हैं।

उच्च-आय वाले देशों की तुलना में निम्न-आय वाले देशों में पढ़ाई पूरी करने वाली नर्सों की संख्या बढ़ रही है। नर्सिंग कार्यबल में लैंगिक प्रतिनिधित्व और समता से जुड़ी चुनौतियाँ हैं। इस क्षेत्र में अधिकाँश नर्स महिलाएँ हैं, जो वैश्विक कार्यबल का क़रीब 85 प्रतिशत हिस्सा हैं।

विश्व भर में हर सात में से एक नर्स, विदेश में जन्मी है, जोकि अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन पर निर्भरता को दर्शाता है। उच्च-आय वाले देशों में यह आकँडा 23 फ़ीसदी है जबकि निम्न-आय वाले देशों मे यह केवल 8 प्रतिशत है।

कुछ देशों में नर्सों की स्नातक दर में प्रगति के बावजूद, बढ़ती आबादी और रोज़गार के कम अवसर होने की वजह से नर्सों की संख्या पर्याप्त स्तर पर नहीं पहुँची है।

विश्व भर में नर्स कार्यबल अपेक्षाकृत युवा है। इनमें 33 फ़ीसदी नर्सों की आयु 35 वर्ष से कम है, जबकि अगले 10 वर्ष में रिटायर होने वाली नर्सों की संख्या 19 फ़ीसदी है

62 प्रतिशत देशों में अत्याधुनिक देखभाल भूमिकाओं के लिए नर्स की मौजूदगी है, जोकि 2020 की तुलना में (53) ठोस वृद्धि को दर्शाता है

मानसिक स्वास्थ्य व देखभाल कर्मियों का कल्याण एक चिन्ता का विषय है। केवल 42 प्रतिशत देशों में ही नर्सों के लिए मानसिक स्वास्थ्य समर्थन उपलब्ध है।

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