भारत की आबादी हुई 144 करोड़, सात दशक बाद हो जाएगी दोगुनी- यूएनपीएफ

यूएनपीएफ द्वारा जारी वार्षिक विश्व जनसंख्या स्थिति रिपोर्ट बताती है कि इस समय भारत की आबादी 144 करोड़ है। इस जनसँख्या में 67 फीसदी लोग शून्य से 24 वर्ष के हैं जबकि 7 फीसदी आबादी 65 वर्ष या इससे अधिक आयु की है।

भारत की आबादी हुई 144 करोड़, सात दशक बाद हो जाएगी दोगुनी- यूएनपीएफ

यूएनपीएफ यानी संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या निधि द्वारा वार्षिक विश्व जनसंख्या स्थिति रिपोर्ट में से पता चलता है कि भारत में सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर होने की वजह से मातृ मृत्यु दर में कमी आई है और जीवन प्रत्याशा बढ़ी है।

यूएनपीएफ ने पीएलओएस ग्लोबल पब्लिक हेल्थ जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर खुलासा किया है कि भारत की जनसंख्या 144.17 करोड़ हो चुकी है। भारत की 24 प्रतिशत आबादी 0-14 वर्ष के लोगों की है। इनमे 17 फीसदी आबादी 10-19 वर्ष वालों की है। रिपोर्ट के मुताबिक़ 10-24 वर्ष की उम्र के लोग 26 फीसदी हैं जबकि 15-64 आयु वर्ग के लोगों की आबादी 68 प्रतिशत बताई गई है।

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या निधि की इस रिपोर्ट के अनुसार इस समय देश की आबादी में 65 साल या इससे अधिक उम्र के लोगों की मौजूदगी महज 7 फीसदी है।

जेंडर के आधार पर एवरेज लाइफ की जानकारी से पता चलता है कि देश में महिलाओं की जीवन प्रत्याशा (life expectancy) 74 वर्ष जबकि पुरुषों की 71 वर्ष और हो गई है।

इस रिपोर्ट के कुछ चिंताजनक पहलुओं की बात करें तो पता चलता है कि 2006-2023 तक भारत में बाल विवाह की दर 23 फीसदी रही। इसके अलावा 77 वर्ष बाद यानी 2101 तक भारत की आबादी बढ़कर दोगुनी होने की बात भी इस रिपोर्ट में कही गई है।

रिपोर्ट से मिली जानकारी में देश के 640 जिलों में सतत विकास लक्ष्यों के मुताबिक मातृ मृत्यु दर का अनुपात 1,00,000 पर 70 है। इनमे 114 ऐसे जिले भी हैं जहां यह अनुपात एक लाख पर 210 या इससे अधिक है।

अरुणाचल प्रदेश का तिराप जिला मातृ मृत्यु दर के मामले सबसे टॉप पर है। यहाँ एक लाख पर 1,671 मातृ मृत्यु दर के मामले सामने आये हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक भारत में लैंगिक भेदभाव भी एक चिंताजनक मामला है। यहाँ दिव्यांग महिलाओं को सामान्य महिलाओं की तुलना में 10 गुना ज्यादा लैंगिक भेदभाव और हिंसा का शिकार होना पड़ता है।

रिपोर्ट के मुताबिक़ देश में 2016 के बाद से हर दिन देश में 800 महिलाओं की मौत प्रसव के दौरान हो जाती है। यहाँ 10 में से एक महिला गर्भनिरोधक के बारे में कोई फैसला लेने की स्थिति में नहीं है जबकि एक चौथाई महिलाएं अपने साथी के साथ यौन संबंध बनाने से इन्कार नहीं कर सकती हैं।

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