देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन बनकर तैयार हो गई है। विशेषज्ञ टीम द्वारा इस ट्रेन की टेस्टिंग हो रही है। लखनऊ स्थित रेलवे के आरडीएसओ के तकनीकी अधिकारी फिलहाल ट्रेन संचालन को लेकर हर बारीक पहलू पर काम कर रहे हैं।

रेलवे की तकनीकी टीम ने मानकों के आधार पर अभिकल्प, विकास एवं मानक संगठन यानी आरडीएसओ द्वारा इसे पटरी पर उतारने से पहले के अंतिम परीक्षण शुरू कर दिये हैं।
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जल्द ही हरियाणा के जींद-सोनीपत रूट पर चलेगी। यह पर्यावरण के अनुकूल ट्रेन शून्य-उत्सर्जन करेगी और भविष्य की हरित रेलवे योजनाओं का हिस्सा है, जिसमें जींद में एक हाइड्रोजन प्लांट भी स्थापित किया गया है।
परिक्षण के दौरान ट्रेन को धीमी और मध्यम गति पर चला कर उपकरणों की कार्यक्षमता को रिकॉर्ड किया गया। टीम का मुख्य फोकस पावर कार और उससे जुड़े सुरक्षा एवं नियंत्रण उपकरणों पर रहा। इसके अलावा ट्रेन के पायदानों की मजबूती और ऊंचाई की भी जांच की गई।
मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के मुताबिक़, उत्तर रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि हरियाणा में जींद और सोनीपत के बीच चलाई जाने वाली इस ट्रेन को लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा चुका है। इस ट्रेन को ईंधन आपूर्ति के लिए जींद में स्थापित किए गए हाइड्रोजन प्लांट को अंतिम कमीशनिंग एवं नियमित संचालन के दौरान स्थिर और निर्बाध 11 केवी बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।
इस संबंध में राज्य के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के अधिकारियों के साथ हाइब्रिड मोड में एक बैठक आयोजित की गई जिसमें प्लांट की वर्तमान विद्युत आपूर्ति स्थिति, बैकअप व्यवस्थाओं और भविष्य की आवश्यकताओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में इस जानकरी से भी अवगत कराया गया कि इस हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना के लिए जींद में तीन हजार किलोग्राम भंडारण क्षमता का देश का सबसे बड़ा हाइड्रोजन प्लांट स्थापित किया गया है। यह कमीशनिंग के अंतिम चरण में है और इस प्लांट से 24 घंटे संचालन होगा।
