बर्फ से ढके सुन्दर पहाड़ों के साथ वन्यजीवों के लिए मशहूर लद्दाख में सफारी का बनाया जाना एक ऐसा अनुभव होगा जो किसी भी पर्यटक को रोमांचित कर सकता है। लद्दाख भारत में स्नो लेपर्ड का सबसे बड़ा आवास है। देश के अनुमानित 718 में से 477 हिम तेंदुए इस क्षेत्र में पाए जाते हैं। इसके अलावा यहां 38 से ज्यादा स्तनधारी और 340 पक्षियों सहित लगभग 1,800 पौधों की प्रजातियां भी पाई जाती हैं।
लद्दाख का नाम अब सफारी से भी जुड़ने वाला है। आने वाले समय में टूरिस्ट यहाँ सुन्दर प्राकृतिक नजारों के साथ स्नो लेपर्ड और कुछ नायब पक्षियों के भी दीदार कर सकेंगे। योजना के लिए ऐसा मॉडल तैयार किया जाएगा, जिसमें स्थानीय समुदाय लद्दाख के नाजुक इकोसिस्टम की सुरक्षा में सक्रिय भागीदारी निभा सकें। साथ ही संरक्षण से जुड़े टूरिज्म के जरिए उन्हें आर्थिक लाभ भी मिले सके।
इस पहल के साथ यहाँ टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ पर्यावरण की सुरक्षा और स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ने का भी प्रयास किया जाएगा। प्रशासन की ओर से इस प्रयास की बदौलत भारत की पहली हाई-एल्टीट्यूड वाइल्डलाइफ सफारी पर काम शुरू करने का फैसला लिया गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, सबसे अहम यह है कि बर्फ से ढके सुन्दर पहाड़ों के साथ वन्यजीवों के लिए मशहूर लद्दाख में सफारी का बनाया जाना एक ऐसा अनुभव होगा जो किसी भी पर्यटक को रोमांचित कर सकता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि लद्दाख प्रशासन ने ऊंचाई वाले संवेदनशील इलाकों में हो रही गैर-कानूनी ऑफ-रोडिंग और वन्यजीवों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए गाइडेड वाइल्डलाइफ सफारी शुरू करने का फैसला लिया गया है।
ख़बरों के अनुसार, यह निर्णय हाल ही में गठित स्नो लेपर्ड एंड हाई-एल्टीट्यूड नेचर (SHAN) कंजर्वेशन सोसाइटी की पहली गवर्निंग बॉडी की बैठक में लिया गया। इस बैठक की अध्यक्षता उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने की। उपराज्यपाल ने स्नो लेपर्ड और बर्ड-वॉचिंग ट्रेल्स पर गाइडेड जीप सफारी को मंजूरी दे दी है।
इस प्रोजेक्ट के लिए वन विभाग को हेमिस नेशनल पार्क, चांगथांग, काराकोरम वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी, नुब्रा, ज़ंस्कार, शाम, करगिल और द्रास जैसे वन्यजीवों से भरपूर इलाकों में संभावित रूट चिन्हित करने का आदेश दिया गया है।
ये सभी इलाक़े स्नो लेपर्ड सहित विभिन्न किस्म के पक्षियों के लिए मशहूर हैं। वन विभाग को काजीरंगा और रणथंभौर जैसे राष्ट्रीय उद्यानों की तर्ज पर गाइडेड जीप सफारी बनाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए जिन खास डिजाइन वाली ओपन-बैक जीपों का इस्तेमाल किया जाएगा, उन्हें ट्रेंड और स्थानीय ड्राइवर और गाइड संचालित करेंगे।
इस सफारी के माध्यम से गैर-कानूनी ऑफ-रोडिंग पर रोक लगाने के साथ वन्यजीवों के जीवन को भी आसान बनाने की कोशिश की जा रही है। इसके साथ ही टूरिस्ट्स को सुरक्षित, व्यवस्थित और पर्यावरण के अनुकूल टूरिज्म का अनुभव देना भी इस योजना का खास पहलू हैं।
मीडिया से बात करते हुए उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना का कहना था कि लद्दाख की अनोखी वन्यजीव संपदा और ऊंचाई वाले नाजुक प्राकृतिक क्षेत्र इसकी सबसे बड़ी ताकत हैं। उनके अनुसार, संरक्षण तभी सफल होगा, जब स्थानीय लोग इसमें बराबर की भागीदारी निभाएं और उन्हें इससे आर्थिक फायदा हासिल कर सकें।
बताते चलें कि लद्दाख भारत में स्नो लेपर्ड का सबसे बड़ा आवास है। देश के अनुमानित 718 में से 477 हिम तेंदुए इस क्षेत्र में पाए जाते हैं। इसके अलावा यहां 38 से ज्यादा स्तनधारी और 340 पक्षियों सहित लगभग 1,800 पौधों की प्रजातियां भी पाई जाती हैं।
ऐसे में एक जरूरी जैव-विविधता वाला क्षेत्र होने के नाते इस योजना के माध्यम से लोकल युवाओं को गाइड का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही महिला कारीगरों को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके लिए कई ऐसे कामों की सूची बनाई गई है जो प्लास्टिक-मुक्त टूरिज्म अभियान के तहत काम में लाए जा सकें।